# सुरति नहिं, बिसरति सुंदर-श्याम।

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भाषा: हिन्दी / ब्रज
स्रोत पहचान: PRM-0953-M19-K202
मूल रचना: प्रेम रस मदिरा — जगद्गुरु श्री कृपालु जी महाराज
माधुरी: विरह-माधुरी
स्थानीय पद संख्या: 202
मूल पद के स्रोत पृष्ठ: 441–441

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## मूल पद

<a id="line-1"></a>सुरति नहिं, बिसरति सुंदर-श्याम।  
<a id="line-2"></a>जब ते लखी श्यामसुंदर छवि, सुंदरताहुँ ललाम।  
<a id="line-3"></a>तब ते हौं बिनु मोल बिकी सो, मोल लियो बिनु दाम।  
<a id="line-4"></a>लखतहिं बनत चपल चितवनि छवि, मृदु-मुसकनि अभिराम।  
<a id="line-5"></a>बसी रहत नैनन मन महँ सोइ, पल-छिन आठों याम।  
<a id="line-6"></a>कह “कृपालु” हौं ही नहिं बावरि, बावरि सब ब्रज-बाम॥

<a id="meaning"></a>
## हिन्दी भावार्थ

श्यामसुन्दर के वियोग में एक गोपी कहती है-''अरी खि! श्यामसुन्दर की सलोनी सूरत भूलकर भी नहीं भूलती। री सखि! सुन्दरता से भी सुन्दर श्यामसुन्दर को जब से देखा तब से मैं बिना मोल के बिक गई हूँ और उन्होंने बिना मूल्य मोल ले लिया है। उनकी चंचल रस भरी चितवन की की एवं मंद-मंद मुस्कान की झाँकी बस देखते ही बनती हे। मेरे नेत्रों एवं मन में निरन्तर वह छवि बसी रहती है कृपालु' कहते हैं ''अरी सखि! मैं अकेली ही बावरी नहीं हुई हूँ समस्त ब्रजांगनाएँ मेरी ही भाँति बावरी हो चुकी हैं।

भावार्थ के स्रोत पृष्ठ: 870-871

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## पद का स्रोत और उद्धरण

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मूल रचना: जगद्गुरु श्री कृपालु जी महाराज। पद और उपलब्ध हिन्दी भावार्थ प्रकाशित पुस्तक के उपलब्ध स्कैन से लिए गए हैं; ये कृत्रिम बुद्धिमत्ता से रचित पद या भावार्थ नहीं हैं। माधुरी और भक्ति चैलेंज के सजावटी चित्र Codex से बनाए गए हैं। वे मूल प्रकाशित पाठ, स्कैन और प्रकाशक के चित्रों से अलग हैं। पुस्तकालय के आवरण उपलब्ध PDF के आवरण/मूल पृष्ठ या प्रकाशक के प्रतिनिधि चित्र हैं; चित्र से संस्करण की समानता सिद्ध नहीं होती।

प्रकाशक के अनुसार प्रेम रस मदिरा में २१ माधुरियों में १,००८ पद हैं। संग्रह में उपलब्ध स्रोत-अभिलेखों की स्थायी पहचान सुरक्षित रखी गई है; संख्या के अंतर का समाधान अभी लंबित है। पाँच हिन्दी भावार्थ उपलब्ध नहीं हैं। हिन्दी भावार्थ पूरे पद का है। पाठ में स्कैन से लिप्यंतरण की त्रुटियाँ रह सकती हैं। यह पाठ पुनर्वितरण की अनुमति नहीं देता।

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मूल रचना की प्रथम प्रकाशन तिथि के उपलब्ध विवरण अलग हैं; इस संग्रह में उसका कोई एक निश्चित वर्ष नहीं माना गया है। अंग्रेज़ी संस्करण का अक्टूबर २००९ का प्रथम-संस्करण वर्ष मूल रचना के प्रथम प्रकाशन का वर्ष नहीं है।
