# सुनी सखि!, जा दिन ते पिय बैन।

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भाषा: हिन्दी / ब्रज
स्रोत पहचान: PRM-0951-M19-K200
मूल रचना: प्रेम रस मदिरा — जगद्गुरु श्री कृपालु जी महाराज
माधुरी: विरह-माधुरी
स्थानीय पद संख्या: 200
मूल पद के स्रोत पृष्ठ: 440–440

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## मूल पद

<a id="line-1"></a>सुनी सखि!, जा दिन ते पिय बैन।  
<a id="line-2"></a>ता दिन ते सखि! एकहुँ पल कहँ, परत न सपनेहुँ चैन।  
<a id="line-3"></a>सब दिन अँसुवन-माल पिरोवति, रोवति सिगरी रैन।  
<a id="line-4"></a>तू प्रानन-प्यारी, यह धुनि सखि!, इक पलहूँ बिसरै न।  
<a id="line-5"></a>भूलि सकत इन नैनन पुनि कत, उन नैनन को सैन।  
<a id="line-6"></a>बैन “कृपालु” सुनन चह श्रवनन, सैन लखन चह नैन॥

<a id="meaning"></a>
## हिन्दी भावार्थ

एक विरहिणी कहती है-''अरी सखि! जिस दिन से श्यामसुन्दर के मधुरातिमधुर शब्दों को श्रवण किया है, उस क से एक क्षण के लिए भी किसी प्रकार भी मन को चैन नहीं है। दिन भर आँसू बहाती रहती हूँ एवं रात भर तड़पती रहती हूँ। "तू मेरी प्राण-प्यारी है'यह प्रियतम को ध्वनि एक क्षण को भी नहीं भूलती, फिर अनादि काल के प्यासे हमारे नेत्र उन श्यामसुन्दर के प्रेमरस परिप्लुत नेत्रां के कटाक्षों को कैसे भूल सकते हैं''? 'कृपालु' कहते हैं कि कान केवल श्यामसुन्दर के ही शब्द सुनना चाहते हैं एवं नेत्र श्यामसुन्दर के ही रस भरे सैन ही देखना चाहते हैं।

भावार्थ के स्रोत पृष्ठ: 868-869

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## पद का स्रोत और उद्धरण

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मूल रचना: जगद्गुरु श्री कृपालु जी महाराज। पद और उपलब्ध हिन्दी भावार्थ प्रकाशित पुस्तक के उपलब्ध स्कैन से लिए गए हैं; ये कृत्रिम बुद्धिमत्ता से रचित पद या भावार्थ नहीं हैं। माधुरी और भक्ति चैलेंज के सजावटी चित्र Codex से बनाए गए हैं। वे मूल प्रकाशित पाठ, स्कैन और प्रकाशक के चित्रों से अलग हैं। पुस्तकालय के आवरण उपलब्ध PDF के आवरण/मूल पृष्ठ या प्रकाशक के प्रतिनिधि चित्र हैं; चित्र से संस्करण की समानता सिद्ध नहीं होती।

प्रकाशक के अनुसार प्रेम रस मदिरा में २१ माधुरियों में १,००८ पद हैं। संग्रह में उपलब्ध स्रोत-अभिलेखों की स्थायी पहचान सुरक्षित रखी गई है; संख्या के अंतर का समाधान अभी लंबित है। पाँच हिन्दी भावार्थ उपलब्ध नहीं हैं। हिन्दी भावार्थ पूरे पद का है। पाठ में स्कैन से लिप्यंतरण की त्रुटियाँ रह सकती हैं। यह पाठ पुनर्वितरण की अनुमति नहीं देता।

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मूल रचना की प्रथम प्रकाशन तिथि के उपलब्ध विवरण अलग हैं; इस संग्रह में उसका कोई एक निश्चित वर्ष नहीं माना गया है। अंग्रेज़ी संस्करण का अक्टूबर २००९ का प्रथम-संस्करण वर्ष मूल रचना के प्रथम प्रकाशन का वर्ष नहीं है।
