# सखी! पिय, अतिशय सरल सुभाय।

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भाषा: हिन्दी / ब्रज
स्रोत पहचान: PRM-0931-M19-K180
मूल रचना: प्रेम रस मदिरा — जगद्गुरु श्री कृपालु जी महाराज
माधुरी: विरह-माधुरी
स्थानीय पद संख्या: 180
मूल पद के स्रोत पृष्ठ: 432–432

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## मूल पद

<a id="line-1"></a>सखी! पिय, अतिशय सरल सुभाय।  
<a id="line-2"></a>अति कोमल-चित कंत, संत कह, तू कठोर कह हाय!।  
<a id="line-3"></a>पिय निर्दोष रोष जनि करु सखि! बात और ही आय।  
<a id="line-4"></a>ना जाने वा कुब्जा ने का, जादू-मंत्र चलाय।  
<a id="line-5"></a>मेरी मानि चलहु सब मथुरा, कुब्जहिं भेष बनाय।  
<a id="line-6"></a>तब “कृपालु” हरि उर लगाय अरु, कुब्जा रह खिसियाय॥

<a id="meaning"></a>
## हिन्दी भावार्थ

(एक सखि द्वारा श्यामसुन्दर को कठोर कहने पर दूसरी सखि विरोध करती हुई कहती है-) अरी सखि! प्रियतम का स्वभाव तो अत्यन्त सरल है। महात्मा नोग भी कहते हैं कि श्यामसुन्दर का हृदय अत्यन्त कोमल है फिर तू कठोर क्यों कहती है? सखि! श्यामसुन्दर निर्दोष हैं। उन पर क्रोध न कर, इसमें कुछ और ही रहस्य है! मेरी राय में तो उस कुब्जा ने ही मोहिनी-मंत्र पढ़ा दिया है, अतएव मेरी बात मान कर सब लोग कुब्जा का वेश बनाकर मथुरा को प्रयाण कर दो। 'कृपालु' कहते हैं कि आजकल प्रियतम को कुबरी स्त्री बहुत प्रिय है, अतएव वे सबको हृदय से नगा लेंगे और वास्तविक कुब्जा खिसियानी सी देखती रह जायेगी।

भावार्थ के स्रोत पृष्ठ: 852

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## पद का स्रोत और उद्धरण

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मूल रचना: जगद्गुरु श्री कृपालु जी महाराज। पद और उपलब्ध हिन्दी भावार्थ प्रकाशित पुस्तक के उपलब्ध स्कैन से लिए गए हैं; ये कृत्रिम बुद्धिमत्ता से रचित पद या भावार्थ नहीं हैं। माधुरी और भक्ति चैलेंज के सजावटी चित्र Codex से बनाए गए हैं। वे मूल प्रकाशित पाठ, स्कैन और प्रकाशक के चित्रों से अलग हैं। पुस्तकालय के आवरण उपलब्ध PDF के आवरण/मूल पृष्ठ या प्रकाशक के प्रतिनिधि चित्र हैं; चित्र से संस्करण की समानता सिद्ध नहीं होती।

प्रकाशक के अनुसार प्रेम रस मदिरा में २१ माधुरियों में १,००८ पद हैं। संग्रह में उपलब्ध स्रोत-अभिलेखों की स्थायी पहचान सुरक्षित रखी गई है; संख्या के अंतर का समाधान अभी लंबित है। पाँच हिन्दी भावार्थ उपलब्ध नहीं हैं। हिन्दी भावार्थ पूरे पद का है। पाठ में स्कैन से लिप्यंतरण की त्रुटियाँ रह सकती हैं। यह पाठ पुनर्वितरण की अनुमति नहीं देता।

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मूल रचना की प्रथम प्रकाशन तिथि के उपलब्ध विवरण अलग हैं; इस संग्रह में उसका कोई एक निश्चित वर्ष नहीं माना गया है। अंग्रेज़ी संस्करण का अक्टूबर २००९ का प्रथम-संस्करण वर्ष मूल रचना के प्रथम प्रकाशन का वर्ष नहीं है।
