# माधो! हम मानत आभार।

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भाषा: हिन्दी / ब्रज
स्रोत पहचान: PRM-0896-M19-K145
मूल रचना: प्रेम रस मदिरा — जगद्गुरु श्री कृपालु जी महाराज
माधुरी: विरह-माधुरी
स्थानीय पद संख्या: 145
मूल पद के स्रोत पृष्ठ: 417–417

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## मूल पद

<a id="line-1"></a>माधो! हम मानत आभार।  
<a id="line-2"></a>रहिहौं ऋणी तिहारो युग युग, जो किय मम उपकार।  
<a id="line-3"></a>साँचो सखा श्यामसुंदर तुम, तीनिहुँ लोक मझार।  
<a id="line-4"></a>अब लौं हौं नहिं जानत रह यह, तुमहिं ब्रह्म करतार।  
<a id="line-5"></a>गोपिन ज्ञान देन मिस मो कहँ, दियो प्रेम उपहार।  
<a id="line-6"></a>हार “कृपालु” जीत भइ मोरी, ज्ञानिन! करहु विचार॥

<a id="meaning"></a>
## हिन्दी भावार्थ

प्रेमरस विभोर उद्धव श्यामसुन्दर से कहते हैं कि तुम्हारे कृतज्ञ हैं। तुमने जो हमारा इतना महान् उपकार किया है उसका मैं युग-युग तक ऋणी रहूँगा। हे श्यामसुन्दर! त्रैलोक्य में तुम्हीं एक सच्चे सखा हो। मैं अब तक यह नहीं जानता था कि तुम्हीं ब्रह्म हो। गोपियों को ज्ञान देने के बहाने तुमने हमें प्रेमदान दे दिया। 'कृपालु' के शब्दों में उद्धव कहते हैं कि अरे ज्ञानियों! तुम लोग थोड़ा गम्भीर विचार करो। मेरी हार भी जीत हो गयी।

भावार्थ के स्रोत पृष्ठ: 827-828

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## पद का स्रोत और उद्धरण

पद और उपलब्ध भावार्थ दिए गए स्रोत से लिप्यंतरित पाठ हैं। उद्धरण में स्रोत के शब्द, विराम-चिह्न और क्रम सुरक्षित रखें; लोप को स्पष्ट चिह्नित करें। सारांश या व्याख्या को अलग से अपना भावानुवाद बताकर इसी पद का संदर्भ दें। स्रोत में पूरे पद का भावार्थ है, शब्द-दर-शब्द या पंक्ति-दर-पंक्ति अर्थ नहीं। लिप्यंतरण की त्रुटियाँ रह सकती हैं।

यह अनौपचारिक, व्यक्तिगत और आंशिक संग्रह है।

मूल रचना: जगद्गुरु श्री कृपालु जी महाराज। पद और उपलब्ध हिन्दी भावार्थ प्रकाशित पुस्तक के उपलब्ध स्कैन से लिए गए हैं; ये कृत्रिम बुद्धिमत्ता से रचित पद या भावार्थ नहीं हैं। माधुरी और भक्ति चैलेंज के सजावटी चित्र Codex से बनाए गए हैं। वे मूल प्रकाशित पाठ, स्कैन और प्रकाशक के चित्रों से अलग हैं। पुस्तकालय के आवरण उपलब्ध PDF के आवरण/मूल पृष्ठ या प्रकाशक के प्रतिनिधि चित्र हैं; चित्र से संस्करण की समानता सिद्ध नहीं होती।

प्रकाशक के अनुसार प्रेम रस मदिरा में २१ माधुरियों में १,००८ पद हैं। संग्रह में उपलब्ध स्रोत-अभिलेखों की स्थायी पहचान सुरक्षित रखी गई है; संख्या के अंतर का समाधान अभी लंबित है। पाँच हिन्दी भावार्थ उपलब्ध नहीं हैं। हिन्दी भावार्थ पूरे पद का है। पाठ में स्कैन से लिप्यंतरण की त्रुटियाँ रह सकती हैं। यह पाठ पुनर्वितरण की अनुमति नहीं देता।

- [आधिकारिक पूर्ण साहित्य संग्रह](https://www.jkpliterature.org.in/)
- [लेखक का आधिकारिक परिचय](https://jagadgurukripalujimaharaj.org.in/)
- [प्रेम रस मदिरा: आधिकारिक पुस्तक विवरण](https://www.jkpliterature.org.in/products/prem-ras-madira-regular-size)
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मूल रचना की प्रथम प्रकाशन तिथि के उपलब्ध विवरण अलग हैं; इस संग्रह में उसका कोई एक निश्चित वर्ष नहीं माना गया है। अंग्रेज़ी संस्करण का अक्टूबर २००९ का प्रथम-संस्करण वर्ष मूल रचना के प्रथम प्रकाशन का वर्ष नहीं है।
