# गये कित, गोधन तजि गोपाल।

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भाषा: हिन्दी / ब्रज
स्रोत पहचान: PRM-0842-M19-K091
मूल रचना: प्रेम रस मदिरा — जगद्गुरु श्री कृपालु जी महाराज
माधुरी: विरह-माधुरी
स्थानीय पद संख्या: 91
मूल पद के स्रोत पृष्ठ: 392–393

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## मूल पद

<a id="line-1"></a>गये कित, गोधन तजि गोपाल।  
<a id="line-2"></a>को गोपाल बिना गो-पालहि, लखु उन गोधन हाल।  
<a id="line-3"></a>रहीं रँभाय रैन-दिन तुम बिनु, कहति आव नँदलाल।  
<a id="line-4"></a>तृन नहिं चर, नहिं पिय यमुना जल, तलफत रह सब काल।  
<a id="line-5"></a>निशि-दिन नैनन नीर बहावति, कृश-तनु विरह बेहाल।  
<a id="line-6"></a>कह “कृपालु” जस गोधन गति तस, बछरन गति भइ लाल॥

<a id="meaning"></a>
## हिन्दी भावार्थ

(श्यामसुन्दर के मथुरा-गमन के पश्चात् ब्रजवासियों का करुण-क्रन्दन) हे गोपाल! तुम अपनी प्राणप्रिय गायों को छोड़कर कहाँ चले गये? तुम्हारे बिना गायों का पालन कौन करेगा? जरा इन गायों की दशा तो देख जाओ। ये तुम्हारे वियोग में रँभा रही हैं मानो कि कह रही हैं-''हे गोपाल आ जाओ।''ये गायें घास नहीं चरतीं, यमुना-जल नहीं पीतीं, दिन-रात तड़पती रहती हैं! प्रतिक्षण आँसू बहाती हैं। तुम्हारे वियोग में इनके अस्थिपंजर मात्र रह गये हैं। 'कृपालु' कहते हैं कि जैसी दयनीय दशा गायों की है, ठीक वैसी ही बछड़ों की भी है।

भावार्थ के स्रोत पृष्ठ: 782

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## पद का स्रोत और उद्धरण

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मूल रचना: जगद्गुरु श्री कृपालु जी महाराज। पद और उपलब्ध हिन्दी भावार्थ प्रकाशित पुस्तक के उपलब्ध स्कैन से लिए गए हैं; ये कृत्रिम बुद्धिमत्ता से रचित पद या भावार्थ नहीं हैं। माधुरी और भक्ति चैलेंज के सजावटी चित्र Codex से बनाए गए हैं। वे मूल प्रकाशित पाठ, स्कैन और प्रकाशक के चित्रों से अलग हैं। पुस्तकालय के आवरण उपलब्ध PDF के आवरण/मूल पृष्ठ या प्रकाशक के प्रतिनिधि चित्र हैं; चित्र से संस्करण की समानता सिद्ध नहीं होती।

प्रकाशक के अनुसार प्रेम रस मदिरा में २१ माधुरियों में १,००८ पद हैं। संग्रह में उपलब्ध स्रोत-अभिलेखों की स्थायी पहचान सुरक्षित रखी गई है; संख्या के अंतर का समाधान अभी लंबित है। पाँच हिन्दी भावार्थ उपलब्ध नहीं हैं। हिन्दी भावार्थ पूरे पद का है। पाठ में स्कैन से लिप्यंतरण की त्रुटियाँ रह सकती हैं। यह पाठ पुनर्वितरण की अनुमति नहीं देता।

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मूल रचना की प्रथम प्रकाशन तिथि के उपलब्ध विवरण अलग हैं; इस संग्रह में उसका कोई एक निश्चित वर्ष नहीं माना गया है। अंग्रेज़ी संस्करण का अक्टूबर २००९ का प्रथम-संस्करण वर्ष मूल रचना के प्रथम प्रकाशन का वर्ष नहीं है।
