# ऊधो!, हमरे आँखि न कान।

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भाषा: हिन्दी / ब्रज
स्रोत पहचान: PRM-0819-M19-K068
मूल रचना: प्रेम रस मदिरा — जगद्गुरु श्री कृपालु जी महाराज
माधुरी: विरह-माधुरी
स्थानीय पद संख्या: 68
मूल पद के स्रोत पृष्ठ: 382–383

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## मूल पद

<a id="line-1"></a>ऊधो!, हमरे आँखि न कान।  
<a id="line-2"></a>जाइ कह्यो उन मनमोहन सों, जो कुब्जा के प्रान।  
<a id="line-3"></a>जाके आँखि होति जग महँ सो, चलत देखि जिय जान।  
<a id="line-4"></a>पै हमरे तो आँखि एक बस, सुंदर श्याम-सुजान।  
<a id="line-5"></a>जाके कान होत जग महँ सो, सुनि समुझत कछु ज्ञान।  
<a id="line-6"></a>पै “कृपालु” हमरे कानन तो, इक पिय-मुरली-तान॥

<a id="meaning"></a>
## हिन्दी भावार्थ

ब्रजांगनाएँ उद्धव के द्वारा संदेशा भेजती हुई कहती हैं कि हे उद्धव! उन कुब्जा के जीवन धन मनमोहन से जाकर कह देना कि हमारे न तो आँख है न कान है। आँख होती है वह देख -देखकर कदम रखता है किन्तु हमारी आँखें तो एक मात्र श्यामसुन्दर को ही देख सकती हैं और कुछ दिखाई ही नहीं पड़ता। संसार में जिसके कान होते हैं वह सुन कर कुछ ज्ञान आदि समझता है। कहती है कि मेरे कान तो एकमात्र श्यामसुन्दर के गुणों, उन्हीं के मुख से निकले हुए शब्दों एवं उनकी मुरली से निकली तान को सुनने की ही सामर्थ्य रखते हैं अन्य कोई भी शब्द सुनाई ही नहीं पड़ता।

भावार्थ के स्रोत पृष्ठ: 763

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## पद का स्रोत और उद्धरण

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मूल रचना: जगद्गुरु श्री कृपालु जी महाराज। पद और उपलब्ध हिन्दी भावार्थ प्रकाशित पुस्तक के उपलब्ध स्कैन से लिए गए हैं; ये कृत्रिम बुद्धिमत्ता से रचित पद या भावार्थ नहीं हैं। माधुरी और भक्ति चैलेंज के सजावटी चित्र Codex से बनाए गए हैं। वे मूल प्रकाशित पाठ, स्कैन और प्रकाशक के चित्रों से अलग हैं। पुस्तकालय के आवरण उपलब्ध PDF के आवरण/मूल पृष्ठ या प्रकाशक के प्रतिनिधि चित्र हैं; चित्र से संस्करण की समानता सिद्ध नहीं होती।

प्रकाशक के अनुसार प्रेम रस मदिरा में २१ माधुरियों में १,००८ पद हैं। संग्रह में उपलब्ध स्रोत-अभिलेखों की स्थायी पहचान सुरक्षित रखी गई है; संख्या के अंतर का समाधान अभी लंबित है। पाँच हिन्दी भावार्थ उपलब्ध नहीं हैं। हिन्दी भावार्थ पूरे पद का है। पाठ में स्कैन से लिप्यंतरण की त्रुटियाँ रह सकती हैं। यह पाठ पुनर्वितरण की अनुमति नहीं देता।

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मूल रचना की प्रथम प्रकाशन तिथि के उपलब्ध विवरण अलग हैं; इस संग्रह में उसका कोई एक निश्चित वर्ष नहीं माना गया है। अंग्रेज़ी संस्करण का अक्टूबर २००९ का प्रथम-संस्करण वर्ष मूल रचना के प्रथम प्रकाशन का वर्ष नहीं है।
