# लला! यह, भला कौन सोँ फाग।

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भाषा: हिन्दी / ब्रज
स्रोत पहचान: PRM-0741-M18-K020
मूल रचना: प्रेम रस मदिरा — जगद्गुरु श्री कृपालु जी महाराज
माधुरी: होरी-माधुरी
स्थानीय पद संख्या: 20
मूल पद के स्रोत पृष्ठ: 348–349

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## मूल पद

<a id="line-1"></a>लला! यह, भला कौन सोँ फाग।  
<a id="line-2"></a>धींगामुश्ती करत लरत जनु, धन्य फाग अनुराग।  
<a id="line-3"></a>जैसेहिं लली चली खेलन कहँ, जात गली महँ भाग।  
<a id="line-4"></a>महापुरुष तोहिं परमपुरुष कह, नाम लगावत दाग।  
<a id="line-5"></a>"हा, हा, हू, हू,"करन जान बस, तान, अलाप न राग।  
<a id="line-6"></a>राजहंस की गति “कृपालु” किमि, जानि सकै कोउ काग॥

<a id="meaning"></a>
## हिन्दी भावार्थ

होली खेलते समय श्यामसुन्दर को फटकारती हुई एक सखी कहती है कि अरे छलिया! तुझको होली खेलना आता भी है? धींगामुश्ती ही करना जानते हो, जैसे झगड़ा कर रहे हो। यही फाग का तरीका है? साहस यह है कि जैसे ही किशोरी जी होली खेलने चलती हैं, वैसे ही गली में भागते हुए दिखाई पड्ते हो। महात्मा लोग तुम्हें परमपुरुष अर्थात् भगवान् कहते हैं किन्तु तुम उस परमपुरुष नाम को कलंकित करते हो। इसके अतिरिक्त गायन सम्बन्धी राग एवं आलाप आदि तो कुछ जानते नहीं केवल हा हा हू हू करना जानते हो। कृपालु'भी व्यंग्य भरे शब्दों में कहता है कि अरी सखी! राजहंस की चाल को भला कौआ कैसे जान सकता है?

भावार्थ के स्रोत पृष्ठ: 698

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## पद का स्रोत और उद्धरण

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मूल रचना: जगद्गुरु श्री कृपालु जी महाराज। पद और उपलब्ध हिन्दी भावार्थ प्रकाशित पुस्तक के उपलब्ध स्कैन से लिए गए हैं; ये कृत्रिम बुद्धिमत्ता से रचित पद या भावार्थ नहीं हैं। माधुरी और भक्ति चैलेंज के सजावटी चित्र Codex से बनाए गए हैं। वे मूल प्रकाशित पाठ, स्कैन और प्रकाशक के चित्रों से अलग हैं। पुस्तकालय के आवरण उपलब्ध PDF के आवरण/मूल पृष्ठ या प्रकाशक के प्रतिनिधि चित्र हैं; चित्र से संस्करण की समानता सिद्ध नहीं होती।

प्रकाशक के अनुसार प्रेम रस मदिरा में २१ माधुरियों में १,००८ पद हैं। संग्रह में उपलब्ध स्रोत-अभिलेखों की स्थायी पहचान सुरक्षित रखी गई है; संख्या के अंतर का समाधान अभी लंबित है। पाँच हिन्दी भावार्थ उपलब्ध नहीं हैं। हिन्दी भावार्थ पूरे पद का है। पाठ में स्कैन से लिप्यंतरण की त्रुटियाँ रह सकती हैं। यह पाठ पुनर्वितरण की अनुमति नहीं देता।

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मूल रचना की प्रथम प्रकाशन तिथि के उपलब्ध विवरण अलग हैं; इस संग्रह में उसका कोई एक निश्चित वर्ष नहीं माना गया है। अंग्रेज़ी संस्करण का अक्टूबर २००९ का प्रथम-संस्करण वर्ष मूल रचना के प्रथम प्रकाशन का वर्ष नहीं है।
