# राधे सँग, श्याम खेलैं होरी।

स्थायी पृष्ठ: https://radhey.shreyam1008.com.np/prem-ras-madira/pad/prm-0740-m18-k019/
भाषा: हिन्दी / ब्रज
स्रोत पहचान: PRM-0740-M18-K019
मूल रचना: प्रेम रस मदिरा — जगद्गुरु श्री कृपालु जी महाराज
माधुरी: होरी-माधुरी
स्थानीय पद संख्या: 19
मूल पद के स्रोत पृष्ठ: 348–348

[English](https://radhey.shreyam1008.com.np/en/prem-ras-madira/pad/prm-0740-m18-k019/) · [पुस्तक की अनुक्रमणिका](https://radhey.shreyam1008.com.np/prem-ras-madira/) · [दोनों भाषाओं में पुस्तक पढ़ें](https://radhey.shreyam1008.com.np/PRM/?pad=740&mode=reader&lang=both) · [दोनों भाषाओं का स्रोत पाठ](https://radhey.shreyam1008.com.np/content/prm/prm-0740-m18-k019.md)

## मूल पद

<a id="line-1"></a>राधे सँग, श्याम खेलैं होरी।  
<a id="line-2"></a>इत अगनित सखियन सँग राधे, उतै सखन श्यामहुँ जोरी।  
<a id="line-3"></a>फाग-समर-आँगन वृंदावन, भिरे दोउ दल झकझोरी।  
<a id="line-4"></a>लालहिं-लाल-गुलाल लाल भये, लाल, लाल भइ ब्रज खोरी।  
<a id="line-5"></a>लै पिचकारिन मार परस्पर, रंग बिरंग रंग घोरी।  
<a id="line-6"></a>केशर-रंगभरी लै गागरि, नागरि, नागर-सर ढोरी।  
<a id="line-7"></a>औचक अवसर लखि रँगदेवी, लालहिं गाल रँगी रोरी।  
<a id="line-8"></a>हारे सखन संग हरि इत, उत, जय जयकार लली को री।  
<a id="line-9"></a>सखि-परिकर कर पकरि बांधि हरि, कह्यो करहु अब बरजोरी।  
<a id="line-10"></a>करि सोरह श्रृंगार लाल को, दियो बनाय सुघर गोरी।  
<a id="line-11"></a>दै “कृपालु” कर ताल अलिन सँग, हँसत कहत हो!हो!होरी॥

<a id="meaning"></a>
## हिन्दी भावार्थ

राधा कृष्ण परस्पर होली खेल रहे हैं। इधर राधिकाजी के साथ असंख्य सखियाँ हैं एवं उधर श्यामसुन्दर के साथ भी असंख्यों सखा हैं। वृन्दावन रणक्षेत्र बना हुआ है एवं वहीं दोनों सेनाओं का होली युद्ध आरम्भ हो गया है। लाल-लाल गुलालों से श्री श्यामसुन्दर भी लाल हो गये हैं एवं ब्रज की गली-गली में लालिमा छा गयी है। पिचकारियों को ले-लेकर दोनों दल एक-दूसरे पर रंग-बिरंगे रंगों को घोलकर मार रहे हैं। इतने में ही किशोरी जी ने एक केशर के रंग से भरा हुआ घड़ा लेकर सहसा श्यामसुन्दर के सिर पर ढुलका दिया। अचानक ही इसी समय मौका पाकर रंगदेवी सखी ने श्यामसुन्दर के गाल में बुरी तरह गुलाल मल दिया। सखाओं के साथ श्रीकृष्ण दल हार गया। सखा लोग भाग खड़े हुए एवं लाड़लीजी की जय जयकार होने लगी। भागते हुए श्रीकृष्ण को सखियों ने पकड़ एवं बाँधकर कहा कि तुम सदा ही हम लोगों को तंग करते रहते हो, आज सब कसर निकाल लेंगी। फिर सखियों ने श्यामसुन्दर का सोलहों सिंगार करके सुन्दर नायिका बना दिया। कृपालु' कहते हैं कि सब सखियों के साथ हम ताली बजा बजाकर हँसने लगे और कहा, "होरी है! होरी है!

भावार्थ के स्रोत पृष्ठ: 697-698

[पिछला पद](https://radhey.shreyam1008.com.np/prem-ras-madira/pad/prm-0739-m18-k018/) · [अगला पद](https://radhey.shreyam1008.com.np/prem-ras-madira/pad/prm-0741-m18-k020/)

## पद का स्रोत और उद्धरण

पद और उपलब्ध भावार्थ दिए गए स्रोत से लिप्यंतरित पाठ हैं। उद्धरण में स्रोत के शब्द, विराम-चिह्न और क्रम सुरक्षित रखें; लोप को स्पष्ट चिह्नित करें। सारांश या व्याख्या को अलग से अपना भावानुवाद बताकर इसी पद का संदर्भ दें। स्रोत में पूरे पद का भावार्थ है, शब्द-दर-शब्द या पंक्ति-दर-पंक्ति अर्थ नहीं। लिप्यंतरण की त्रुटियाँ रह सकती हैं।

यह अनौपचारिक, व्यक्तिगत और आंशिक संग्रह है।

मूल रचना: जगद्गुरु श्री कृपालु जी महाराज। पद और उपलब्ध हिन्दी भावार्थ प्रकाशित पुस्तक के उपलब्ध स्कैन से लिए गए हैं; ये कृत्रिम बुद्धिमत्ता से रचित पद या भावार्थ नहीं हैं। माधुरी और भक्ति चैलेंज के सजावटी चित्र Codex से बनाए गए हैं। वे मूल प्रकाशित पाठ, स्कैन और प्रकाशक के चित्रों से अलग हैं। पुस्तकालय के आवरण उपलब्ध PDF के आवरण/मूल पृष्ठ या प्रकाशक के प्रतिनिधि चित्र हैं; चित्र से संस्करण की समानता सिद्ध नहीं होती।

प्रकाशक के अनुसार प्रेम रस मदिरा में २१ माधुरियों में १,००८ पद हैं। संग्रह में उपलब्ध स्रोत-अभिलेखों की स्थायी पहचान सुरक्षित रखी गई है; संख्या के अंतर का समाधान अभी लंबित है। पाँच हिन्दी भावार्थ उपलब्ध नहीं हैं। हिन्दी भावार्थ पूरे पद का है। पाठ में स्कैन से लिप्यंतरण की त्रुटियाँ रह सकती हैं। यह पाठ पुनर्वितरण की अनुमति नहीं देता।

- [आधिकारिक पूर्ण साहित्य संग्रह](https://www.jkpliterature.org.in/)
- [लेखक का आधिकारिक परिचय](https://jagadgurukripalujimaharaj.org.in/)
- [प्रेम रस मदिरा: आधिकारिक पुस्तक विवरण](https://www.jkpliterature.org.in/products/prem-ras-madira-regular-size)
- [संस्करण और स्रोत प्रमाण](https://radhey.shreyam1008.com.np/content/provenance.json)
- [पुस्तकालय के आवरणों का स्रोत विवरण](https://radhey.shreyam1008.com.np/content/books/index.json)
- [स्रोत और पाठ-सुधार](https://radhey.shreyam1008.com.np/collection/)

मूल रचना की प्रथम प्रकाशन तिथि के उपलब्ध विवरण अलग हैं; इस संग्रह में उसका कोई एक निश्चित वर्ष नहीं माना गया है। अंग्रेज़ी संस्करण का अक्टूबर २००९ का प्रथम-संस्करण वर्ष मूल रचना के प्रथम प्रकाशन का वर्ष नहीं है।
