# यह होरी है, लली! या बरजोरी।

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भाषा: हिन्दी / ब्रज
स्रोत पहचान: PRM-0735-M18-K014
मूल रचना: प्रेम रस मदिरा — जगद्गुरु श्री कृपालु जी महाराज
माधुरी: होरी-माधुरी
स्थानीय पद संख्या: 14
मूल पद के स्रोत पृष्ठ: 345–346

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## मूल पद

<a id="line-1"></a>यह होरी है, लली! या बरजोरी।  
<a id="line-2"></a>जहँ कहुँ पाव लँगर कोउ इकलिहिं, करत वाय रँग सरबोरी।  
<a id="line-3"></a>तुम्हरे राज पाँय दुख हम सब, जाय लाज बाबा को री।  
<a id="line-4"></a>लली कहीं, सब निज-निज घट महँ, भरहु रंग केसर घोरी।  
<a id="line-5"></a>पुनि जल-यमुन भरन मिस चल सब, पिचकारिन घट महँ बोरी।  
<a id="line-6"></a>एक सखी रह डगर ठड़ी अरु, सिगरी दुरहु कुंज खोरी।  
<a id="line-7"></a>जैसेहिं लँगर वाय छेड़े सब, घेरि लेहु चारिहुँ ओरी।  
<a id="line-8"></a>पुनि इक संग रंग पिचकारिन, मारि मलहु गालहुँ रोरी।  
<a id="line-9"></a>पुनि सब पकरि बांधि लै आवहु, सुनहु सखी मोरी पोरी।  
<a id="line-10"></a>तब “कृपालु” हौं मन की करिहौं, कहिहौं"कहु कैसी होरी?"॥

<a id="meaning"></a>
## हिन्दी भावार्थ

होली के दिनों में श्यामसुन्दर के ऊधम से तंग आकर किशोरी जी से एक सखी कहती है, हे किशोरी जी! को अकेली पाता है उसके अंग-अंग को रंग में सराबोर कर देता है। तुम्हारे राज्य में हम सब इस प्रकार दुःख पायें, यह वृषभानु बाबा की लज्जा का प्रश्न है।''किशोरी जी ने आज्ञा दी है कि समस्त सखियाँ अपने-अपने घड़ों में केशर घोल कर भर लें, फिर जमुना जल भरने के बहाने घड़ा सिर पर रख कर चलें एवं अपनी-अपनी पिचकारी को अपने-अपने घड़ों में डुबो दें। एक सखी मार्ग के बीचों-बीच खड़ी हो जाये तथा शेष सखियाँ लताओं के बीच छिप जायें। जैसे ही वह नटखट मार्ग में खड़ी उस सखी को छेड़े वैसे ही समस्त सखियाँ मिलकर एक साथ चारों ओर से घेर लें। फिर सब सखियाँ एक साथ ही उसे रंग में सराबोर कर दें एवं एक साथ ही भली-भाति गुलाल भी मल दें। फिर सब सखियाँ पकड़कर और बाँधकर उसे मेरे महल में ले आवें। 'कृपालु' के शब्दों में किशोरी जी कहती हैं फिर मैं अपनी मनमानी करूँगी अब कहो कैसी होली है?

भावार्थ के स्रोत पृष्ठ: 692-693

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## पद का स्रोत और उद्धरण

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मूल रचना की प्रथम प्रकाशन तिथि के उपलब्ध विवरण अलग हैं; इस संग्रह में उसका कोई एक निश्चित वर्ष नहीं माना गया है। अंग्रेज़ी संस्करण का अक्टूबर २००९ का प्रथम-संस्करण वर्ष मूल रचना के प्रथम प्रकाशन का वर्ष नहीं है।
