# माधव सँग, माधव आयो री।

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भाषा: हिन्दी / ब्रज
स्रोत पहचान: PRM-0732-M18-K011
मूल रचना: प्रेम रस मदिरा — जगद्गुरु श्री कृपालु जी महाराज
माधुरी: होरी-माधुरी
स्थानीय पद संख्या: 11
मूल पद के स्रोत पृष्ठ: 344–344

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## मूल पद

<a id="line-1"></a>माधव सँग, माधव आयो री।  
<a id="line-2"></a>चलु माधवि! सखियन सँग माधव, माधवि-कुंज बुलायो री।  
<a id="line-3"></a>कह माधवि हम जानत माधव, कुंजन फाग रचायो री।  
<a id="line-4"></a>अलिगन छलन चहत सो छलिया, याते अस जनि जायो री।  
<a id="line-5"></a>सब ब्रज नारिन लै पिचकारिन, कंचुकि माहिं दुरायो री।  
<a id="line-6"></a>कनक कटोरिन भरि-भरि रोरिन, तापर कुसुम सजायो री।  
<a id="line-7"></a>कछु सखियन भरि-भरि घट रंगन, कुंजन माहिं बिठायो री।  
<a id="line-8"></a>पुनि तहँ जाय रंग इक संगहिं, डारि गुलाल उड़ायो री।  
<a id="line-9"></a>पुनिकोउकर, कोउपग, कोउकटिधरि, बांधिललिहिंढिगलायोरी।  
<a id="line-10"></a>तहाँ “कृपालु” बनाय दुल्हनियाँ, घर-घर जाय दिखायो री॥

<a id="meaning"></a>
## हिन्दी भावार्थ

श्यामसुन्दर भी आये हैं। ''हे किशोरी जी! सखियों के साथ चलो श्यामसुन्दर ने तुम्हें माधवी कुंज में बुलाया है।''किशोरी जी ने कहा-' अरी सखी! मैं जान गयी; श्यामसुन्दर निकुंज में होली खेलना चाहते हैं। वे छलपूर्वक सबको बुला रहे हैं इसलिये खाली हाथ कोई मत जाना। सब सखियाँ पिचकारी को चोली में छिपा लो एवं सोने की कटोरिंयों में सब लोग गुलाल भर लो, उसके ऊपर फूलों को सजा लो। कुछ सखियाँ रंग बिरंगे रंगों को घड़ों में भरकर लताऔँ में छुपकर बैठ जाओ। फिर वहाँ जाकर सब लोग एक साथ ही पिचकारियों से रंग मारो तथा एक साथ ही गुलाल भी उड़ाओ। फिर चारों ओर से घेर कर कोई उसका हाथ पकड़ लो। इस प्रकार बाँध कर मेरे पास ले आओ!''कृपालु' कहते हैं कि किशोरी जी के पास ले जाकर दुलहिन बनाकर घर-घर में दिखला आओ। मुँह दिखाई में जो कुछ मिले उसका प्रसाद बाँट देना।

भावार्थ के स्रोत पृष्ठ: 689-690

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## पद का स्रोत और उद्धरण

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मूल रचना: जगद्गुरु श्री कृपालु जी महाराज। पद और उपलब्ध हिन्दी भावार्थ प्रकाशित पुस्तक के उपलब्ध स्कैन से लिए गए हैं; ये कृत्रिम बुद्धिमत्ता से रचित पद या भावार्थ नहीं हैं। माधुरी और भक्ति चैलेंज के सजावटी चित्र Codex से बनाए गए हैं। वे मूल प्रकाशित पाठ, स्कैन और प्रकाशक के चित्रों से अलग हैं। पुस्तकालय के आवरण उपलब्ध PDF के आवरण/मूल पृष्ठ या प्रकाशक के प्रतिनिधि चित्र हैं; चित्र से संस्करण की समानता सिद्ध नहीं होती।

प्रकाशक के अनुसार प्रेम रस मदिरा में २१ माधुरियों में १,००८ पद हैं। संग्रह में उपलब्ध स्रोत-अभिलेखों की स्थायी पहचान सुरक्षित रखी गई है; संख्या के अंतर का समाधान अभी लंबित है। पाँच हिन्दी भावार्थ उपलब्ध नहीं हैं। हिन्दी भावार्थ पूरे पद का है। पाठ में स्कैन से लिप्यंतरण की त्रुटियाँ रह सकती हैं। यह पाठ पुनर्वितरण की अनुमति नहीं देता।

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मूल रचना की प्रथम प्रकाशन तिथि के उपलब्ध विवरण अलग हैं; इस संग्रह में उसका कोई एक निश्चित वर्ष नहीं माना गया है। अंग्रेज़ी संस्करण का अक्टूबर २००९ का प्रथम-संस्करण वर्ष मूल रचना के प्रथम प्रकाशन का वर्ष नहीं है।
