# आजा आजा रे, आज खेलन होरी।

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भाषा: हिन्दी / ब्रज
स्रोत पहचान: PRM-0722-M18-K001
मूल रचना: प्रेम रस मदिरा — जगद्गुरु श्री कृपालु जी महाराज
माधुरी: होरी-माधुरी
स्थानीय पद संख्या: 1
मूल पद के स्रोत पृष्ठ: 339–339

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## मूल पद

<a id="line-1"></a>आजा आजा रे, आज खेलन होरी।  
<a id="line-2"></a>कालि लाल इकलिहिं लखि लालिहिं, अंग अंग दिय रँग बोरी।  
<a id="line-3"></a>आजु चलीं खेलन होरी लखु, लली संग लख-लख गोरी।  
<a id="line-4"></a>टेरि सखान कान्ह कह"आव न, ललकारति ब्रज की छोरी"।  
<a id="line-5"></a>सखन-सखिन, अरु कुँवर-कुँवरि सँग, भई होरी की झकझोरी।  
<a id="line-6"></a>लाल-गुलाल रंग पिचकारिन, कीच मची गहवर-खोरी।  
<a id="line-7"></a>मनसुख मन कछु सूझ ठिठोरी, कह्यो"सखन सुनियो मोरी।  
<a id="line-8"></a>लाला बँध्यो हारि लाली ते, भाजहु सब अपुनी पोरी"।  
<a id="line-9"></a>जब लौं लाला कहत"झूठ यह", तब लौं भज्यो सखन दोरी।  
<a id="line-10"></a>इकलेहिं लालहिं बाँधि अली सब, चलीं लली-महलन ओरी।  
<a id="line-11"></a>कह “कृपालु” तहँ कहा भयो सखि, जनि पूछहु अस बरजोरी॥

<a id="meaning"></a>
## हिन्दी भावार्थ

सखियाँ श्यामसुन्दर को होली खेलने के लिए नलकारती हुई कहती हैं-''ओ नटखट! आज होली खेलने आ जा। कल तूने किशोरी जी को अकेली जान कर उनके अंग-अंग को रंग में सरोबार कर दिया था, आज किशोरी के साथ लाखों गोपियाँ होली खेलने आई हैं।''श्यामसुन्दर ने भी सखाओं को पुकार कर कहा-''अरे सखाओं! जल्दी आओ आज ब्रज की छोकरियाँ हमको ललकार रही हैं। बस फिर क्या था? एक-एक सखी एक-एक सखा के साथ होली खेलने लगी एवं किशोरी जी श्यामसुन्दर के साथ होली खेलने लगीं, इस प्रकार दोनों में धुँआधार होली होने लगी। लाल-लाल गुलालों एवं पिचकारियों के रंगों द्वारा गहवर-वन की गली-गली में कीचड़ हो गयी। इतने में ही मनसुख के मन में कुछ परिहास सूझा और उसने सखाओं को पुकार कर कहा "अरे सखाओं! जरा मेरी सुन लो लाला तो हार कर लाली से बँध गये हैं। अब सब अपने अपने घर जाओ, नहीं तो सब बाँधे जाओगे।''जब तक श्यामसुन्दर यह कहते हैं कि मनसुख झूठ बोलता है, तब तक सब ग्वालबाल भाग गये। अब तो अकेले श्यामसुन्दर को सचमुच ही सखियों ने बाँध लिया और महल की ओर ले चलीं। 'कृपालु' ने पूछा अरी सखी! फिर महल में क्य हुआ?''सखी ने कहा ""यह मत पूछो, ठाकुर जी की बहुत बुरी गत बनायी गयी।

भावार्थ के स्रोत पृष्ठ: 680-681

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## पद का स्रोत और उद्धरण

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