# सुनो मम, प्रियतम नंदकुमार।

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भाषा: हिन्दी / ब्रज
स्रोत पहचान: PRM-0665-M16-K012
मूल रचना: प्रेम रस मदिरा — जगद्गुरु श्री कृपालु जी महाराज
माधुरी: मान-माधुरी
स्थानीय पद संख्या: 12
मूल पद के स्रोत पृष्ठ: 312–312

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## मूल पद

<a id="line-1"></a>सुनो मम, प्रियतम नंदकुमार।  
<a id="line-2"></a>तुम मम प्राणनाथ प्राणेश्वर, तुम मम प्राणाधार।  
<a id="line-3"></a>तुम यह भलीभाँति हो जानत, तुम ही सों मम प्यार।  
<a id="line-4"></a>हौं हूँ यदपि जान यह नीके, तुम सब जग भरतार।  
<a id="line-5"></a>तदपि प्रेम बस मानत अपनोइ, सबै भाँति अधिकार।  
<a id="line-6"></a>कह “कृपालु” यह ज्ञान जात बहि, प्रेम पयोधि मझार॥

<a id="meaning"></a>
## हिन्दी भावार्थ

मानभंग की अवस्था में किशोरी जी श्यामसुन्दर से कहती हैं कि हे प्रियतम! तुम मेरे प्राणनाथ, प्राणेश्वर प्राणाधार हो। तुम यह भली- भाँति जानते हो कि हमारा प्यार एक मात्र तुम्हीं से है। यद्यपि मैं भी भली-भाँति यह जानती हूँ कि तुम समस्त संसार के प्रियतम हो फिर भी प्रेम-विभोर हो जाने के कारण मैं पूर्णाधिकार अपना ही मानने लगती हूँ। कृपालु' कहते हैं कि ज्ञान-सिद्धान्त प्रेम-रसधारा में वह जाया करता है।

भावार्थ के स्रोत पृष्ठ: 628

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## पद का स्रोत और उद्धरण

पद और उपलब्ध भावार्थ दिए गए स्रोत से लिप्यंतरित पाठ हैं। उद्धरण में स्रोत के शब्द, विराम-चिह्न और क्रम सुरक्षित रखें; लोप को स्पष्ट चिह्नित करें। सारांश या व्याख्या को अलग से अपना भावानुवाद बताकर इसी पद का संदर्भ दें। स्रोत में पूरे पद का भावार्थ है, शब्द-दर-शब्द या पंक्ति-दर-पंक्ति अर्थ नहीं। लिप्यंतरण की त्रुटियाँ रह सकती हैं।

यह अनौपचारिक, व्यक्तिगत और आंशिक संग्रह है।

मूल रचना: जगद्गुरु श्री कृपालु जी महाराज। पद और उपलब्ध हिन्दी भावार्थ प्रकाशित पुस्तक के उपलब्ध स्कैन से लिए गए हैं; ये कृत्रिम बुद्धिमत्ता से रचित पद या भावार्थ नहीं हैं। माधुरी और भक्ति चैलेंज के सजावटी चित्र Codex से बनाए गए हैं। वे मूल प्रकाशित पाठ, स्कैन और प्रकाशक के चित्रों से अलग हैं। पुस्तकालय के आवरण उपलब्ध PDF के आवरण/मूल पृष्ठ या प्रकाशक के प्रतिनिधि चित्र हैं; चित्र से संस्करण की समानता सिद्ध नहीं होती।

प्रकाशक के अनुसार प्रेम रस मदिरा में २१ माधुरियों में १,००८ पद हैं। संग्रह में उपलब्ध स्रोत-अभिलेखों की स्थायी पहचान सुरक्षित रखी गई है; संख्या के अंतर का समाधान अभी लंबित है। पाँच हिन्दी भावार्थ उपलब्ध नहीं हैं। हिन्दी भावार्थ पूरे पद का है। पाठ में स्कैन से लिप्यंतरण की त्रुटियाँ रह सकती हैं। यह पाठ पुनर्वितरण की अनुमति नहीं देता।

- [आधिकारिक पूर्ण साहित्य संग्रह](https://www.jkpliterature.org.in/)
- [लेखक का आधिकारिक परिचय](https://jagadgurukripalujimaharaj.org.in/)
- [प्रेम रस मदिरा: आधिकारिक पुस्तक विवरण](https://www.jkpliterature.org.in/products/prem-ras-madira-regular-size)
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मूल रचना की प्रथम प्रकाशन तिथि के उपलब्ध विवरण अलग हैं; इस संग्रह में उसका कोई एक निश्चित वर्ष नहीं माना गया है। अंग्रेज़ी संस्करण का अक्टूबर २००९ का प्रथम-संस्करण वर्ष मूल रचना के प्रथम प्रकाशन का वर्ष नहीं है।
