# मन मोहि लियो मनमोहना।

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भाषा: हिन्दी / ब्रज
स्रोत पहचान: PRM-0620-M15-K037
मूल रचना: प्रेम रस मदिरा — जगद्गुरु श्री कृपालु जी महाराज
माधुरी: मिलन-माधुरी
स्थानीय पद संख्या: 37
मूल पद के स्रोत पृष्ठ: 291–292

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## मूल पद

<a id="line-1"></a>मन मोहि लियो मनमोहना।  
<a id="line-2"></a>बरजी सखी, जाहु जनि तहँ कहुँ, मन-मोहन मन मोह ना।  
<a id="line-3"></a>पुनि सोइ कही, जाहु जो तो सखि!, नैनन मोहन जोह ना।  
<a id="line-4"></a>हौं नहिं मानी, किय मनमानी, जानी नहिं अस सोहना।  
<a id="line-5"></a>लखतहिं भई विकल उत, इत यह, डर कहुँ होय बिछोह ना।  
<a id="line-6"></a>धरु “कृपालु” उर धीर, निराशा, प्रेम माहिं सखि! सोह ना॥

<a id="meaning"></a>
## हिन्दी भावार्थ

एक सखी कहती है कि मनमोहन ने मेरे मन को हर लिया। क्या बताऊँ मेरी सखी ने मुझे रोका था कि मनमोहन के पास न जाना, नहीं तो वे मन को मोहित कर लेंगे। उसी सखी ने यह भी कहा था अगर जाना भी तो आँखों से मोहन को न देखना। मैंने उसकी बात नहीं मानी, मनमानी की। मुझे स्वप्न में भी यह ध्यान नहीं था कि इतना सुन्दर भी कोई हो सकता है। अब देखते ही मैं घायल हो गयी। साथ ही यह भय उत्पन्न हो गया कि कहीं वियोग न हो जाय। 'कृपालु' कहते हैं कि अरी सखि! धीरज धरो। प्रेम में निराशा अशोभनीय है।

भावार्थ के स्रोत पृष्ठ: 591-592

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## पद का स्रोत और उद्धरण

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मूल रचना: जगद्गुरु श्री कृपालु जी महाराज। पद और उपलब्ध हिन्दी भावार्थ प्रकाशित पुस्तक के उपलब्ध स्कैन से लिए गए हैं; ये कृत्रिम बुद्धिमत्ता से रचित पद या भावार्थ नहीं हैं। माधुरी और भक्ति चैलेंज के सजावटी चित्र Codex से बनाए गए हैं। वे मूल प्रकाशित पाठ, स्कैन और प्रकाशक के चित्रों से अलग हैं। पुस्तकालय के आवरण उपलब्ध PDF के आवरण/मूल पृष्ठ या प्रकाशक के प्रतिनिधि चित्र हैं; चित्र से संस्करण की समानता सिद्ध नहीं होती।

प्रकाशक के अनुसार प्रेम रस मदिरा में २१ माधुरियों में १,००८ पद हैं। संग्रह में उपलब्ध स्रोत-अभिलेखों की स्थायी पहचान सुरक्षित रखी गई है; संख्या के अंतर का समाधान अभी लंबित है। पाँच हिन्दी भावार्थ उपलब्ध नहीं हैं। हिन्दी भावार्थ पूरे पद का है। पाठ में स्कैन से लिप्यंतरण की त्रुटियाँ रह सकती हैं। यह पाठ पुनर्वितरण की अनुमति नहीं देता।

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मूल रचना की प्रथम प्रकाशन तिथि के उपलब्ध विवरण अलग हैं; इस संग्रह में उसका कोई एक निश्चित वर्ष नहीं माना गया है। अंग्रेज़ी संस्करण का अक्टूबर २००९ का प्रथम-संस्करण वर्ष मूल रचना के प्रथम प्रकाशन का वर्ष नहीं है।
