# छुवो जनि, मनमोहन तन मोर।

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भाषा: हिन्दी / ब्रज
स्रोत पहचान: PRM-0607-M15-K024
मूल रचना: प्रेम रस मदिरा — जगद्गुरु श्री कृपालु जी महाराज
माधुरी: मिलन-माधुरी
स्थानीय पद संख्या: 24
मूल पद के स्रोत पृष्ठ: 286–286

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## मूल पद

<a id="line-1"></a>छुवो जनि, मनमोहन तन मोर।  
<a id="line-2"></a>"सखि! मोहिं कह मनमोहन पुनि कत, इत ममता तनु तोर"।  
<a id="line-3"></a>सखि कह"हौं पतिव्रता दियो मन, तन नहिं तोहिं चितचोर"।  
<a id="line-4"></a>"सखि! काहुहिं व्रत होत मनहिं ते, सुनु यह श्रुतिन निचोर।  
<a id="line-5"></a>सखि सुनु मर्म, सर्व-धर्मन तजि, जो भज नंदकिशोर।  
<a id="line-6"></a>वाको पाप “कृपालु” क्षमा करि, देउँ प्रेम-रस बोर॥

<a id="meaning"></a>
## हिन्दी भावार्थ

(एक सखी की श्यामसुन्दर से विनोदमयी उक्ति-) हे मनमोहन! मेरे शरीर को मत छुओ। मनमोहन ने कहा अरी सखि! तू मुझे मनमोहन भी कहती है और शरीर से इतनी ममता भी रखती है''सखी ने कहा- "मैं पतित्रता स्त्री हूँ। मैंने तुम्हें मन दिया है, तन नहीं दिया।''मनमोहन ने कहा-अरी सखि! पतिब्रत अथवा कोई भी व्रत मन की आसक्ति से ही होता है। यह समस्त शास्त्रों वेदों का निचोड़ है। अरी सखि! सुन, जो सब धर्मो को छोड़कर मन से केवल मुझ से ही प्यार करता है- 'कृपालु' के शब्दों में मैं उसके धर्मों को छोड़ने एवं अन्य समस्त पापों को क्षमा कर देता हूँ और उसे प्रेम-रस में सराबोर कर देता हूँ।

भावार्थ के स्रोत पृष्ठ: 581

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## पद का स्रोत और उद्धरण

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मूल रचना: जगद्गुरु श्री कृपालु जी महाराज। पद और उपलब्ध हिन्दी भावार्थ प्रकाशित पुस्तक के उपलब्ध स्कैन से लिए गए हैं; ये कृत्रिम बुद्धिमत्ता से रचित पद या भावार्थ नहीं हैं। माधुरी और भक्ति चैलेंज के सजावटी चित्र Codex से बनाए गए हैं। वे मूल प्रकाशित पाठ, स्कैन और प्रकाशक के चित्रों से अलग हैं। पुस्तकालय के आवरण उपलब्ध PDF के आवरण/मूल पृष्ठ या प्रकाशक के प्रतिनिधि चित्र हैं; चित्र से संस्करण की समानता सिद्ध नहीं होती।

प्रकाशक के अनुसार प्रेम रस मदिरा में २१ माधुरियों में १,००८ पद हैं। संग्रह में उपलब्ध स्रोत-अभिलेखों की स्थायी पहचान सुरक्षित रखी गई है; संख्या के अंतर का समाधान अभी लंबित है। पाँच हिन्दी भावार्थ उपलब्ध नहीं हैं। हिन्दी भावार्थ पूरे पद का है। पाठ में स्कैन से लिप्यंतरण की त्रुटियाँ रह सकती हैं। यह पाठ पुनर्वितरण की अनुमति नहीं देता।

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मूल रचना की प्रथम प्रकाशन तिथि के उपलब्ध विवरण अलग हैं; इस संग्रह में उसका कोई एक निश्चित वर्ष नहीं माना गया है। अंग्रेज़ी संस्करण का अक्टूबर २००९ का प्रथम-संस्करण वर्ष मूल रचना के प्रथम प्रकाशन का वर्ष नहीं है।
