# कालि की, बात कहौं आली।

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भाषा: हिन्दी / ब्रज
स्रोत पहचान: PRM-0597-M15-K014
मूल रचना: प्रेम रस मदिरा — जगद्गुरु श्री कृपालु जी महाराज
माधुरी: मिलन-माधुरी
स्थानीय पद संख्या: 14
मूल पद के स्रोत पृष्ठ: 282–282

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## मूल पद

<a id="line-1"></a>कालि की, बात कहौं आली।  
<a id="line-2"></a>भानु-सुता-तट भानु-सुता गइ, कालि आलि लाली।  
<a id="line-3"></a>तहँ रह मुरली मधुर बजावत, ठाढ़ो वनमाली।  
<a id="line-4"></a>द्वै दृग ह्वै गये चार अचानक, प्रेम-पाश घाली।  
<a id="line-5"></a>लखतहिं गिरी नागरिहिं गागरि, निर्मल-जल वाली।  
<a id="line-6"></a>उत “कृपालु” नागर गिरि मुरलिहुँ, कह देखी भाली॥

<a id="meaning"></a>
## हिन्दी भावार्थ

एक सखी अपनी अन्तरंग सखी से श्यामा-श्याम के प्रथम मधुर-मिलन की बात बताती हुई कहती है कि अरी सखि! कल की बात है, श्री किशोरी जी यमुना के किनारे गयी थीं। वहीं पर श्यामसुन्दर खड़े हुए मुरली बजा रहे थे। अचानक दोनों की आँखें चार हो गयीं एवं दोनों प्रेम-रस विभोर हो गये। इधर तो श्री किशोरी जी के सिर पर रखी हुई निर्मल जल वाली गागरी नीचे गिर गयी और उधर 'कृपालु' के शब्दों में क के हाथ से मुरली भी गिर गयी। देखी बता रही हूँ।

भावार्थ के स्रोत पृष्ठ: 573-574

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## पद का स्रोत और उद्धरण

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मूल रचना: जगद्गुरु श्री कृपालु जी महाराज। पद और उपलब्ध हिन्दी भावार्थ प्रकाशित पुस्तक के उपलब्ध स्कैन से लिए गए हैं; ये कृत्रिम बुद्धिमत्ता से रचित पद या भावार्थ नहीं हैं। माधुरी और भक्ति चैलेंज के सजावटी चित्र Codex से बनाए गए हैं। वे मूल प्रकाशित पाठ, स्कैन और प्रकाशक के चित्रों से अलग हैं। पुस्तकालय के आवरण उपलब्ध PDF के आवरण/मूल पृष्ठ या प्रकाशक के प्रतिनिधि चित्र हैं; चित्र से संस्करण की समानता सिद्ध नहीं होती।

प्रकाशक के अनुसार प्रेम रस मदिरा में २१ माधुरियों में १,००८ पद हैं। संग्रह में उपलब्ध स्रोत-अभिलेखों की स्थायी पहचान सुरक्षित रखी गई है; संख्या के अंतर का समाधान अभी लंबित है। पाँच हिन्दी भावार्थ उपलब्ध नहीं हैं। हिन्दी भावार्थ पूरे पद का है। पाठ में स्कैन से लिप्यंतरण की त्रुटियाँ रह सकती हैं। यह पाठ पुनर्वितरण की अनुमति नहीं देता।

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मूल रचना की प्रथम प्रकाशन तिथि के उपलब्ध विवरण अलग हैं; इस संग्रह में उसका कोई एक निश्चित वर्ष नहीं माना गया है। अंग्रेज़ी संस्करण का अक्टूबर २००९ का प्रथम-संस्करण वर्ष मूल रचना के प्रथम प्रकाशन का वर्ष नहीं है।
