# कान्ह कछु कै गयो टोना री।

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भाषा: हिन्दी / ब्रज
स्रोत पहचान: PRM-0595-M15-K012
मूल रचना: प्रेम रस मदिरा — जगद्गुरु श्री कृपालु जी महाराज
माधुरी: मिलन-माधुरी
स्थानीय पद संख्या: 12
मूल पद के स्रोत पृष्ठ: 281–281

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## मूल पद

<a id="line-1"></a>कान्ह कछु कै गयो टोना री।  
<a id="line-2"></a>यमुना-तट रह धेनु चरावत, श्याम सलोना री।  
<a id="line-3"></a>हौं तहँ गई, अचानक देखी, नंद डुठोना री।  
<a id="line-4"></a>देखत ही मोहिं डस्यो दृगन जनु, नागिनि छोना री।  
<a id="line-5"></a>तन, मन, प्राण सबै सखि! लै अब, दै गयो रोना री।  
<a id="line-6"></a>दिवस “कृपालु” न चैन एक छिन, रैन न सोना री॥

<a id="meaning"></a>
## हिन्दी भावार्थ

एक सखी का प्यारे श्यामसुन्दर से प्रथम मधुर मिलन, एवं उसका अपनी एक अंतरंग सखी से कहना।) अरी सखी! श्यामसुन्दर मेरे ऊपर कुछ टोना-सा कर गया। यमुना के किनारे वह श्यामसुन्दर गाय चरा रहा था। मैं अचानक ही वहाँ पर गई एवं मैंने उसको देखा। देखते ही उसकी आँखों ने नागिन बनकर मुझे डस लिया। अरी सखी! वह मेरा तन, मन और प्राण सभी कुछ लेकर उसके बदले में रोना-मात्र ही दे गया। 'कृपालु' कहते हैं कि अब उसके वियोग में न तो मुझे दिन में एक क्षण के लिए चैन ही मिलता है और न तो रात में नींद ही आती है अर्थात् उसके मधुर-मिलन के लिए निरंतर तड़पती ही रहती हूँ।

भावार्थ के स्रोत पृष्ठ: 571-572

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## पद का स्रोत और उद्धरण

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मूल रचना: जगद्गुरु श्री कृपालु जी महाराज। पद और उपलब्ध हिन्दी भावार्थ प्रकाशित पुस्तक के उपलब्ध स्कैन से लिए गए हैं; ये कृत्रिम बुद्धिमत्ता से रचित पद या भावार्थ नहीं हैं। माधुरी और भक्ति चैलेंज के सजावटी चित्र Codex से बनाए गए हैं। वे मूल प्रकाशित पाठ, स्कैन और प्रकाशक के चित्रों से अलग हैं। पुस्तकालय के आवरण उपलब्ध PDF के आवरण/मूल पृष्ठ या प्रकाशक के प्रतिनिधि चित्र हैं; चित्र से संस्करण की समानता सिद्ध नहीं होती।

प्रकाशक के अनुसार प्रेम रस मदिरा में २१ माधुरियों में १,००८ पद हैं। संग्रह में उपलब्ध स्रोत-अभिलेखों की स्थायी पहचान सुरक्षित रखी गई है; संख्या के अंतर का समाधान अभी लंबित है। पाँच हिन्दी भावार्थ उपलब्ध नहीं हैं। हिन्दी भावार्थ पूरे पद का है। पाठ में स्कैन से लिप्यंतरण की त्रुटियाँ रह सकती हैं। यह पाठ पुनर्वितरण की अनुमति नहीं देता।

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मूल रचना की प्रथम प्रकाशन तिथि के उपलब्ध विवरण अलग हैं; इस संग्रह में उसका कोई एक निश्चित वर्ष नहीं माना गया है। अंग्रेज़ी संस्करण का अक्टूबर २००९ का प्रथम-संस्करण वर्ष मूल रचना के प्रथम प्रकाशन का वर्ष नहीं है।
