# अरी सखि!, किरिकिरि आँखि परी।

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भाषा: हिन्दी / ब्रज
स्रोत पहचान: PRM-0584-M15-K001
मूल रचना: प्रेम रस मदिरा — जगद्गुरु श्री कृपालु जी महाराज
माधुरी: मिलन-माधुरी
स्थानीय पद संख्या: 1
मूल पद के स्रोत पृष्ठ: 276–276

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## मूल पद

<a id="line-1"></a>अरी सखि!, किरिकिरि आँखि परी।  
<a id="line-2"></a>जब ते परी किरिकिरी तबते, नींदिहुँ गई भग री।  
<a id="line-3"></a>कोटि यतन करि करि हौं हारी, तबहूँ नहिं निकरी।  
<a id="line-4"></a>अब मोहिं कल ते परत न कहुँ कल, पल-छिन एक घरी।  
<a id="line-5"></a>करहु तुमहिं उपचार सखी! कछु, नैननि लाग झरी।  
<a id="line-6"></a>हौं “कृपालु” जानत हौं नीके, यह किरिकिरी"हरी"॥

<a id="meaning"></a>
## हिन्दी भावार्थ

एक सखी अंतरंग सखी से कहती है कि अरी सखी! मेरी आँख में तो किरकिरी सी पड़ गयी है। जब से वह किरकिरी पड़ी है तभी से नींद भी नहीं आती। मैं करोड़ों प्रयत्न कर चुकी किन्तु यह किरकिरी नहीं निकलती। कल से मुझे एक क्षण के लिए कहीं भी चैन नहीं मिलता। अरी सखी! आँखों में वर्षा-ऋतु लगी है। तू ही कुछ उपाय कर। 'कृपालु के शब्दों में अंतरंग सखी ने कहा कि मैं भली-भाँति जानती हूँ कि यह किरकिरी श्यामसुन्दर ही हैं।

भावार्थ के स्रोत पृष्ठ: 562-563

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## पद का स्रोत और उद्धरण

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मूल रचना: जगद्गुरु श्री कृपालु जी महाराज। पद और उपलब्ध हिन्दी भावार्थ प्रकाशित पुस्तक के उपलब्ध स्कैन से लिए गए हैं; ये कृत्रिम बुद्धिमत्ता से रचित पद या भावार्थ नहीं हैं। माधुरी और भक्ति चैलेंज के सजावटी चित्र Codex से बनाए गए हैं। वे मूल प्रकाशित पाठ, स्कैन और प्रकाशक के चित्रों से अलग हैं। पुस्तकालय के आवरण उपलब्ध PDF के आवरण/मूल पृष्ठ या प्रकाशक के प्रतिनिधि चित्र हैं; चित्र से संस्करण की समानता सिद्ध नहीं होती।

प्रकाशक के अनुसार प्रेम रस मदिरा में २१ माधुरियों में १,००८ पद हैं। संग्रह में उपलब्ध स्रोत-अभिलेखों की स्थायी पहचान सुरक्षित रखी गई है; संख्या के अंतर का समाधान अभी लंबित है। पाँच हिन्दी भावार्थ उपलब्ध नहीं हैं। हिन्दी भावार्थ पूरे पद का है। पाठ में स्कैन से लिप्यंतरण की त्रुटियाँ रह सकती हैं। यह पाठ पुनर्वितरण की अनुमति नहीं देता।

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मूल रचना की प्रथम प्रकाशन तिथि के उपलब्ध विवरण अलग हैं; इस संग्रह में उसका कोई एक निश्चित वर्ष नहीं माना गया है। अंग्रेज़ी संस्करण का अक्टूबर २००९ का प्रथम-संस्करण वर्ष मूल रचना के प्रथम प्रकाशन का वर्ष नहीं है।
