# युगलवर, झूलनि की बलिहार।

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भाषा: हिन्दी / ब्रज
स्रोत पहचान: PRM-0573-M14-K019
मूल रचना: प्रेम रस मदिरा — जगद्गुरु श्री कृपालु जी महाराज
माधुरी: निकुंज-माधुरी
स्थानीय पद संख्या: 19
मूल पद के स्रोत पृष्ठ: 270–270

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## मूल पद

<a id="line-1"></a>युगलवर, झूलनि की बलिहार।  
<a id="line-2"></a>नागरि अरु नागर झुकि झूमत, भल गलबाँहीं डार।  
<a id="line-3"></a>उमड़ि घुमड़ि घन गरजत चमकति, चपला बारम्बार।  
<a id="line-4"></a>पंचम सुर सों तान अलापति, गावति सखिन मलार।  
<a id="line-5"></a>गावत ही घन बरसन लागे, भीजत दोउ सरकार।  
<a id="line-6"></a>धनि “कृपालु” सो बाँकी झाँकी, धनि जिन ताहि निहार॥

<a id="meaning"></a>
## हिन्दी भावार्थ

युगल सरकार के झूलने पर मैं बलिहार जाता हूँ। श्यामा श्याम गलबाहीं दिये हुए झुक-झुककर झूल रहे हैं उमड़ घुमड़ कर बादल गरज रहे हैं एवं बार-बार बिजली चमक रही है। सखियाँ मल्हार गाती हुई पंचम स्वर से तान अलाप रही हैं। मल्हार राग गाते ही बादल बरसने लगे, जिससे श्यामा श्याम भीग रहे हैं। 'कृपालु' कहते हैं कि युगल सरकार की इस सुन्दर झाँकी को धन्य है एवं इस झाँकी के देखने वालों को और भी धन्य है।

भावार्थ के स्रोत पृष्ठ: 552

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## पद का स्रोत और उद्धरण

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मूल रचना की प्रथम प्रकाशन तिथि के उपलब्ध विवरण अलग हैं; इस संग्रह में उसका कोई एक निश्चित वर्ष नहीं माना गया है। अंग्रेज़ी संस्करण का अक्टूबर २००९ का प्रथम-संस्करण वर्ष मूल रचना के प्रथम प्रकाशन का वर्ष नहीं है।
