# किशोरी सँग, नाचत नवल किशोर।

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भाषा: हिन्दी / ब्रज
स्रोत पहचान: PRM-0560-M14-K006
मूल रचना: प्रेम रस मदिरा — जगद्गुरु श्री कृपालु जी महाराज
माधुरी: निकुंज-माधुरी
स्थानीय पद संख्या: 6
मूल पद के स्रोत पृष्ठ: 263–264

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## मूल पद

<a id="line-1"></a>किशोरी सँग, नाचत नवल किशोर।  
<a id="line-2"></a>लली लाल मंडल बिच राजत, ललितादिक चहुँ ओर।  
<a id="line-3"></a>इक ते इक संगीत निपुन सखि, गावति प्रेम-विभोर।  
<a id="line-4"></a>बजत वाद्य बहु विधि पुनि कंकन, किंकिनि नूपुर सोर।  
<a id="line-5"></a>ता थेइ, ता थेइ, थेइ करि निरतत, बहु विधि अंग मरोर।  
<a id="line-6"></a>लेत अलाप “कृपालु” लाल पै, तान लली बरजोर॥

<a id="meaning"></a>
## हिन्दी भावार्थ

श्री वृषभानुकिशोरी के साथ श्री नन्दकिशोर नाच रहे हैं। श्यामा-श्याम मण्डल के बीच में खड़े हैं एवं चारों ओर ललितादिक सहस्रं सखियाँ खड़ी हैं। गायन-कला में निपुण ब्रजांगनाएँ प्रेम-विभोर होकर अनेक राग गा रही हैं। अनेक प्रकार के बाजे बज रहे हैं एवं सब के शरीर से कंकण, किंकिण एवं नूपुर की ध्वनि हो रही है। अपने अंगों को मरोड़ते हुए ता थेइ, ता थेइ, थेइ करते हुए नाच रहे हैं। कृपालु' कहते हैं कि श्यामसुन्दर यद्यपि मधुर आलाप ले रहे हैं तथापि लाड़िली जी की तान की मधुरिमा कुछ और ही है।

भावार्थ के स्रोत पृष्ठ: 541

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## पद का स्रोत और उद्धरण

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मूल रचना की प्रथम प्रकाशन तिथि के उपलब्ध विवरण अलग हैं; इस संग्रह में उसका कोई एक निश्चित वर्ष नहीं माना गया है। अंग्रेज़ी संस्करण का अक्टूबर २००९ का प्रथम-संस्करण वर्ष मूल रचना के प्रथम प्रकाशन का वर्ष नहीं है।
