# आजु रस, बरसत कुंजन माहिं।

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भाषा: हिन्दी / ब्रज
स्रोत पहचान: PRM-0557-M14-K003
मूल रचना: प्रेम रस मदिरा — जगद्गुरु श्री कृपालु जी महाराज
माधुरी: निकुंज-माधुरी
स्थानीय पद संख्या: 3
मूल पद के स्रोत पृष्ठ: 262–262

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## मूल पद

<a id="line-1"></a>आजु रस, बरसत कुंजन माहिं।  
<a id="line-2"></a>मंजु-निकुंजनि-मंजुलता लखि, विधि विधिताहुँ लजाहिं।  
<a id="line-3"></a>झूला डर्यो कदंब डार पै, पै झूलत दोउ नाहिं।  
<a id="line-4"></a>पिय कह प्यारी ते"तुम झूलहु, हौं तोहिं काहिं झुलाहिं"।  
<a id="line-5"></a>प्यारी कह पिय ते"तुम झूलहु, हौं झुलवहुँ तोहि काहिं"।  
<a id="line-6"></a>नहिं कोउ झूलत नाहिं झुलावत, बहु विधि सखि समुझाहिं।  
<a id="line-7"></a>तब “कृपालु” कह तुम दोउ झूलहु, हम दोउ झुलवत आहिं॥

<a id="meaning"></a>
## हिन्दी भावार्थ

आज कुंज में विलक्षण रस बरस रहा है। सुन्दर निकुंज की सुन्दरता देखकर ब्रह्मा की कारीगरी भी लज्जित होती है। यद्यपि कदम्ब की डाल में झूला पड़ा है किन्तु प्रिया प्रियतम दोनों ही नहीं झूलते। श्यामसुन्दर कहते हैं कि हे सुकुमारी! तुम झूलो और मैं झुलाऊँ। किशोरी जी कहती हैं के हे सुकुमार! तुम झूलो और मैं झुलाऊँ। इस प्रकार न कोई भूलता है और न कोई झुलाता है। सब सखियाँ समझा-समझाकर थक गयीं। तब 'कृपालु' ने कहा कि तुम दोनों में न कोई एक भूले और न कोई एक झुलावे वरन् तुम दोनों साथ बैठकर थूलो और मैं झुलाऊँ।

भावार्थ के स्रोत पृष्ठ: 538

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## पद का स्रोत और उद्धरण

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मूल रचना: जगद्गुरु श्री कृपालु जी महाराज। पद और उपलब्ध हिन्दी भावार्थ प्रकाशित पुस्तक के उपलब्ध स्कैन से लिए गए हैं; ये कृत्रिम बुद्धिमत्ता से रचित पद या भावार्थ नहीं हैं। माधुरी और भक्ति चैलेंज के सजावटी चित्र Codex से बनाए गए हैं। वे मूल प्रकाशित पाठ, स्कैन और प्रकाशक के चित्रों से अलग हैं। पुस्तकालय के आवरण उपलब्ध PDF के आवरण/मूल पृष्ठ या प्रकाशक के प्रतिनिधि चित्र हैं; चित्र से संस्करण की समानता सिद्ध नहीं होती।

प्रकाशक के अनुसार प्रेम रस मदिरा में २१ माधुरियों में १,००८ पद हैं। संग्रह में उपलब्ध स्रोत-अभिलेखों की स्थायी पहचान सुरक्षित रखी गई है; संख्या के अंतर का समाधान अभी लंबित है। पाँच हिन्दी भावार्थ उपलब्ध नहीं हैं। हिन्दी भावार्थ पूरे पद का है। पाठ में स्कैन से लिप्यंतरण की त्रुटियाँ रह सकती हैं। यह पाठ पुनर्वितरण की अनुमति नहीं देता।

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मूल रचना की प्रथम प्रकाशन तिथि के उपलब्ध विवरण अलग हैं; इस संग्रह में उसका कोई एक निश्चित वर्ष नहीं माना गया है। अंग्रेज़ी संस्करण का अक्टूबर २००९ का प्रथम-संस्करण वर्ष मूल रचना के प्रथम प्रकाशन का वर्ष नहीं है।
