# रंगदेवी सखियन सरनाम।

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भाषा: हिन्दी / ब्रज
स्रोत पहचान: PRM-0550-M13-K004
मूल रचना: प्रेम रस मदिरा — जगद्गुरु श्री कृपालु जी महाराज
माधुरी: महासखी-माधुरी
स्थानीय पद संख्या: 4
मूल पद के स्रोत पृष्ठ: 258–258

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## मूल पद

<a id="line-1"></a>रंगदेवी सखियन सरनाम।  
<a id="line-2"></a>पुंडरीक-किंजल्क बरन तनु, लखि लाजत शत काम।  
<a id="line-3"></a>पहिरे वसन जपा कुसुमन रँग, सोहति अति अभिराम।  
<a id="line-4"></a>विविध भाँति भूषण पहिरावति, नित प्रति श्यामा-श्याम।  
<a id="line-5"></a>परम चतुर श्रृंगार-कला महँ, नहिं पटतर कोउ बाम।  
<a id="line-6"></a>रहति “कृपालु” निकुंजविहारिणि, संगहिं आठों याम॥

<a id="meaning"></a>
## हिन्दी भावार्थ

रंगदेवी सखि समस्त सखियों में प्रख्यात सखि है इनके शरीर का रंग कमल के केशर के समान है एवं इनकी रूप-माधुरी से सैकड़ों कामदेव लज्जित होते हैं। (लाल रंग का बरसाती कीड़ा) के रंग के अत्यन्त ही सुन्दर कपड़े पहनती हैं। यह नित्यप्रति प्रिया-प्रियतम को अनेक प्रकार के गहने पहनाती हैं, एवं शृंगार करने की कला इनकी समानता की चतुर गोपी और कोई नहीं है। कहते हैं कि यह सदा किशोरी जी के साथ रहती हैं।

भावार्थ के स्रोत पृष्ठ: 527-531

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## पद का स्रोत और उद्धरण

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मूल रचना: जगद्गुरु श्री कृपालु जी महाराज। पद और उपलब्ध हिन्दी भावार्थ प्रकाशित पुस्तक के उपलब्ध स्कैन से लिए गए हैं; ये कृत्रिम बुद्धिमत्ता से रचित पद या भावार्थ नहीं हैं। माधुरी और भक्ति चैलेंज के सजावटी चित्र Codex से बनाए गए हैं। वे मूल प्रकाशित पाठ, स्कैन और प्रकाशक के चित्रों से अलग हैं। पुस्तकालय के आवरण उपलब्ध PDF के आवरण/मूल पृष्ठ या प्रकाशक के प्रतिनिधि चित्र हैं; चित्र से संस्करण की समानता सिद्ध नहीं होती।

प्रकाशक के अनुसार प्रेम रस मदिरा में २१ माधुरियों में १,००८ पद हैं। संग्रह में उपलब्ध स्रोत-अभिलेखों की स्थायी पहचान सुरक्षित रखी गई है; संख्या के अंतर का समाधान अभी लंबित है। पाँच हिन्दी भावार्थ उपलब्ध नहीं हैं। हिन्दी भावार्थ पूरे पद का है। पाठ में स्कैन से लिप्यंतरण की त्रुटियाँ रह सकती हैं। यह पाठ पुनर्वितरण की अनुमति नहीं देता।

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मूल रचना की प्रथम प्रकाशन तिथि के उपलब्ध विवरण अलग हैं; इस संग्रह में उसका कोई एक निश्चित वर्ष नहीं माना गया है। अंग्रेज़ी संस्करण का अक्टूबर २००९ का प्रथम-संस्करण वर्ष मूल रचना के प्रथम प्रकाशन का वर्ष नहीं है।
