# नवल लिलिहारिनि की बलिहार।

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भाषा: हिन्दी / ब्रज
स्रोत पहचान: PRM-0537-M12-K015
मूल रचना: प्रेम रस मदिरा — जगद्गुरु श्री कृपालु जी महाराज
माधुरी: लीला-माधुरी
स्थानीय पद संख्या: 15
मूल पद के स्रोत पृष्ठ: 251–251

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## मूल पद

<a id="line-1"></a>नवल लिलिहारिनि की बलिहार।  
<a id="line-2"></a>लखी लली! मैं भली, अली कह, कुंज गली लिलिहार।  
<a id="line-3"></a>मोही मोही, जोही जोही, सोही मोही नार।  
<a id="line-4"></a>अगणित मणि-गण-किरण-विभूषण, अगणित विधुगण वार।  
<a id="line-5"></a>गज गामिनि, अभिरामिनि भामिनि, दुति दामिनि अनुहार।  
<a id="line-6"></a>सुनि “कृपालु” गुन गुनगर्वीली, लिय बुलाय सरकार॥

<a id="meaning"></a>
## हिन्दी भावार्थ

लिलिहारिन के भेष में श्यामसुन्दर को देखकर एक सखि कहती है कि हे किशोरी जी! मैंने आज कुंज गली में एक सुन्दर लिलिहारिन को देखा है और देखते ही मैं बलिहार गयी। हे किशोरी जी! उसने मेरे मन को ही मोहित नहीं किया, किन्तु मेरे अतिरिक्त भी जिस किसी ने उसको देखा वही मोहित हो गयी। उसके गहनों में अनेक मणियों की किरणें इतनी चमक रही थीं कि अनेक चन्द्रमा उन पर न्यौछावर किये जा सकते हैं। वह मतवाले हाथी की चाल से चल रही थी। उसके शरीर से बिजली के समान तेज चमचमा रहा था। 'कृपालु' के शब्दों में गुणों की स्वाभिमानिनि स्वामिनी जी ने लिलिहारिनि के उपर्युक्त गुण सुनकर महल में बुला लिया।

भावार्थ के स्रोत पृष्ठ: 514-515

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## पद का स्रोत और उद्धरण

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मूल रचना: जगद्गुरु श्री कृपालु जी महाराज। पद और उपलब्ध हिन्दी भावार्थ प्रकाशित पुस्तक के उपलब्ध स्कैन से लिए गए हैं; ये कृत्रिम बुद्धिमत्ता से रचित पद या भावार्थ नहीं हैं। माधुरी और भक्ति चैलेंज के सजावटी चित्र Codex से बनाए गए हैं। वे मूल प्रकाशित पाठ, स्कैन और प्रकाशक के चित्रों से अलग हैं। पुस्तकालय के आवरण उपलब्ध PDF के आवरण/मूल पृष्ठ या प्रकाशक के प्रतिनिधि चित्र हैं; चित्र से संस्करण की समानता सिद्ध नहीं होती।

प्रकाशक के अनुसार प्रेम रस मदिरा में २१ माधुरियों में १,००८ पद हैं। संग्रह में उपलब्ध स्रोत-अभिलेखों की स्थायी पहचान सुरक्षित रखी गई है; संख्या के अंतर का समाधान अभी लंबित है। पाँच हिन्दी भावार्थ उपलब्ध नहीं हैं। हिन्दी भावार्थ पूरे पद का है। पाठ में स्कैन से लिप्यंतरण की त्रुटियाँ रह सकती हैं। यह पाठ पुनर्वितरण की अनुमति नहीं देता।

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मूल रचना की प्रथम प्रकाशन तिथि के उपलब्ध विवरण अलग हैं; इस संग्रह में उसका कोई एक निश्चित वर्ष नहीं माना गया है। अंग्रेज़ी संस्करण का अक्टूबर २००९ का प्रथम-संस्करण वर्ष मूल रचना के प्रथम प्रकाशन का वर्ष नहीं है।
