# चलीं ललि, आजु छलन नँदलाल।

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भाषा: हिन्दी / ब्रज
स्रोत पहचान: PRM-0530-M12-K008
मूल रचना: प्रेम रस मदिरा — जगद्गुरु श्री कृपालु जी महाराज
माधुरी: लीला-माधुरी
स्थानीय पद संख्या: 8
मूल पद के स्रोत पृष्ठ: 247–247

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## मूल पद

<a id="line-1"></a>चलीं ललि, आजु छलन नँदलाल।  
<a id="line-2"></a>मुकुट मयूर-पुच्छ-गुच्छन सिर, खौरि तिलक दिय भाल।  
<a id="line-3"></a>दुपटी, पीतपटी, लकुटी कर, गर-गुंजन-वनमाल।  
<a id="line-4"></a>छूटी लट, कानन कुंडल मुख, मुरली-शब्द रसाल।  
<a id="line-5"></a>काछनि काछे कटितट अटपट, नटखट सोँ चलि चाल।  
<a id="line-6"></a>गोरे ग्वाल भानुपुर के बनि, गइँ “कृपालु” ढिंग लाल॥

<a id="meaning"></a>
## हिन्दी भावार्थ

(लाडली जी का गोरे ग्वाल का वेश बनाकर श्रीकृष्ण आज किशोरी जी नन्दलाल को छलने जा रही हैं, अतएव मोर के पंखों का मुकुट पहन लिया है एवं ललाट में केसर का तिलक लगा लिया है। पीताम्बर ओढ़े हुए हैं एवं हाथ में लठिया लिए हैं तथा गले में गुंज-माला व वनमाला पहन ली है। अपनी वेणी को खोल दिया है एवं कानों में कुण्डल पहन लिये हैं तथा मधुर मुरली बजा रही हैं। कमर में सुन्दर काछनी काछे हुए हैं एवं नंदलाल की ही चंचल चाल से चल रही हैं इस प्रकार 'कृपालु' कहते हैं कि अपने-आपको बरसाने का ग्वाल कहती हुई किशोरी जी ने नन्दलाल को ठगने के लिए प्रस्थान किया।

भावार्थ के स्रोत पृष्ठ: 508-509

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## पद का स्रोत और उद्धरण

पद और उपलब्ध भावार्थ दिए गए स्रोत से लिप्यंतरित पाठ हैं। उद्धरण में स्रोत के शब्द, विराम-चिह्न और क्रम सुरक्षित रखें; लोप को स्पष्ट चिह्नित करें। सारांश या व्याख्या को अलग से अपना भावानुवाद बताकर इसी पद का संदर्भ दें। स्रोत में पूरे पद का भावार्थ है, शब्द-दर-शब्द या पंक्ति-दर-पंक्ति अर्थ नहीं। लिप्यंतरण की त्रुटियाँ रह सकती हैं।

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मूल रचना: जगद्गुरु श्री कृपालु जी महाराज। पद और उपलब्ध हिन्दी भावार्थ प्रकाशित पुस्तक के उपलब्ध स्कैन से लिए गए हैं; ये कृत्रिम बुद्धिमत्ता से रचित पद या भावार्थ नहीं हैं। माधुरी और भक्ति चैलेंज के सजावटी चित्र Codex से बनाए गए हैं। वे मूल प्रकाशित पाठ, स्कैन और प्रकाशक के चित्रों से अलग हैं। पुस्तकालय के आवरण उपलब्ध PDF के आवरण/मूल पृष्ठ या प्रकाशक के प्रतिनिधि चित्र हैं; चित्र से संस्करण की समानता सिद्ध नहीं होती।

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मूल रचना की प्रथम प्रकाशन तिथि के उपलब्ध विवरण अलग हैं; इस संग्रह में उसका कोई एक निश्चित वर्ष नहीं माना गया है। अंग्रेज़ी संस्करण का अक्टूबर २००९ का प्रथम-संस्करण वर्ष मूल रचना के प्रथम प्रकाशन का वर्ष नहीं है।
