# अरी वो, लीला गोदनिहार।

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भाषा: हिन्दी / ब्रज
स्रोत पहचान: PRM-0525-M12-K003
मूल रचना: प्रेम रस मदिरा — जगद्गुरु श्री कृपालु जी महाराज
माधुरी: लीला-माधुरी
स्थानीय पद संख्या: 3
मूल पद के स्रोत पृष्ठ: 244–245

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## मूल पद

<a id="line-1"></a>अरी वो, लीला गोदनिहार।  
<a id="line-2"></a>छवि श्रृंगार निहारि तिहारी, लाजत छवि श्रृंगार।  
<a id="line-3"></a>कौन गाम की? कौन नाम की? कौन पुरुष की नार?।  
<a id="line-4"></a>दिव्यधाम की, दिव्य नाम की, दिव्य पुरुष भरतार।  
<a id="line-5"></a>कौन काम ते गाम हमारे, आई तू सुकुमार?।  
<a id="line-6"></a>""सुन्यो कान तव रूप अनूपम, तीनिहुँ लोक मझार।  
<a id="line-7"></a>ताते ओछी जाति भेष धरि, आई बनि लिलिहार।  
<a id="line-8"></a>लंपट मिल्यो तबहुँ मो कहँ इक, कह"प्यारी! करु प्यार"।  
<a id="line-9"></a>लीला गोदन मोहिं सिखायो, आदि पुरुष करतार""।  
<a id="line-10"></a>लीला गोदु अंग प्रति अंगनि, नँदनंदन की झार।  
<a id="line-11"></a>लीला गोदि समोद गोद गिरि, कह"हा भानुदुलार"।  
<a id="line-12"></a>लिय “कृपालु” पहिचान सखिन तब, कंचुकि मुरलि निहार॥

<a id="meaning"></a>
## हिन्दी भावार्थ

श्री किशोरी जी श्यामसुन्दर रूपी लिलिहारिनि से कहती हैं अरी ओ लीला गोदने वाली! तेरे रूप एवं श्रृंगार को देखकर तो साक्षात् रूप एवं शृंगार भी लज्जित होता है। तू किस गाँव की है, तेरा नाम क्या है, तेरे पति का नाम क्या है? लिलिहारिन ने उत्तर दिया मैं दिव्यधाम की हूँ, मेरा नाम दिव्य है एवं मेरा पति भी दिव्य पुरुष है। किशोरी जी ने कहा-फिर तू हमारे गाँव में किस काम से आई है? लिलिहारिन ने कहा कि मैंने यह सुना था कि त्रैलोक्य में तुम्हारे समान सुन्दर रूप और किसी का नहीं है अतएव देखने आ गयी हूँ और इसीलिए ओछी जाति का भेष बनाकर आयी हूँ। किशोरी जी! क्या बताऊँ फिर भी रास्ते में एक लम्पट मिल ही गया जिसने मुझसे कहा-अरी प्यारी! मुझसे प्यार कर ले। किशोरी जी मुझे लीला गोदना आदि पुरुष भगवान् ने सिखाया है। किशोरी जी ने कहा-अच्छा ठीक है तू मेरे अंग-अंग में नन्दनन्दन की लीलाओं को गोद दे। लीला गोदने के पश्चात् आनन्द विभोर होकर ''हा भानुदुलारी'', कहकर वह लिलिहारिन किशोरी जी की गोद में मूर्च्छित होकर गिर पड़ी। 'कृपालु' के शब्दों में चोली में छुपी हुई मुरली को देखकर सखियों ने पहिचान लिया कि यह वही छलिया है।

भावार्थ के स्रोत पृष्ठ: 502-504

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## पद का स्रोत और उद्धरण

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