# सखी सुनु, प्रिया पियहिं इक बात।

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भाषा: हिन्दी / ब्रज
स्रोत पहचान: PRM-0516-M11-K017
मूल रचना: प्रेम रस मदिरा — जगद्गुरु श्री कृपालु जी महाराज
माधुरी: युगल-माधुरी
स्थानीय पद संख्या: 17
मूल पद के स्रोत पृष्ठ: 239–240

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## मूल पद

<a id="line-1"></a>सखी सुनु, प्रिया पियहिं इक बात।  
<a id="line-2"></a>दोउन हमरो ठाकुर दोउन, प्रानन-प्यारो नात।  
<a id="line-3"></a>पै दोउन महँ कौन बड़ो सखि, यह नहिं सोचि सकात।  
<a id="line-4"></a>जब पिय सों पूछति सो प्यारिहिं, गुन गावत न अघात।  
<a id="line-5"></a>जब प्यारिहिं पूछति सोउ पिवु को, गुन अगनित गनि जात।  
<a id="line-6"></a>कह “कृपालु” जब दोउ इक तब कत, सखि! इत मति भरमात॥

<a id="meaning"></a>
## हिन्दी भावार्थ

एक सखि कहती है—अरी सखि! प्रिया-प्रियतम की एक विलक्षण बात सुन। यद्यपि दोनों ही मेरे स्वामी हैं एवं दोनों ही से मेरा प्राणप्यारा नाता है, तथापि मैं यह निश्चय नहीं कर पाती कि इन दोनों में कौन अधिक सरस है। जब 'प्यारी' से पूछती हूँ तब प्यारी प्रियतम के अगणित गुण गाने लगाती हैं एवं जब प्रियतम से पूछती हूँ तब वे भी प्यारी जी की प्रशंसा के पुल बाँध देते हैं। 'कृपालु' कहते हैं—''अरी सखि! इन दोनों के शरीर ही दो हैं, शेष सब बातें एक ही हैं। तू व्यर्थ ही खोपड़ी लगाकर क्यों चिन्तित होती है?''

भावार्थ के स्रोत पृष्ठ: 494

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## पद का स्रोत और उद्धरण

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मूल रचना: जगद्गुरु श्री कृपालु जी महाराज। पद और उपलब्ध हिन्दी भावार्थ प्रकाशित पुस्तक के उपलब्ध स्कैन से लिए गए हैं; ये कृत्रिम बुद्धिमत्ता से रचित पद या भावार्थ नहीं हैं। माधुरी और भक्ति चैलेंज के सजावटी चित्र Codex से बनाए गए हैं। वे मूल प्रकाशित पाठ, स्कैन और प्रकाशक के चित्रों से अलग हैं। पुस्तकालय के आवरण उपलब्ध PDF के आवरण/मूल पृष्ठ या प्रकाशक के प्रतिनिधि चित्र हैं; चित्र से संस्करण की समानता सिद्ध नहीं होती।

प्रकाशक के अनुसार प्रेम रस मदिरा में २१ माधुरियों में १,००८ पद हैं। संग्रह में उपलब्ध स्रोत-अभिलेखों की स्थायी पहचान सुरक्षित रखी गई है; संख्या के अंतर का समाधान अभी लंबित है। पाँच हिन्दी भावार्थ उपलब्ध नहीं हैं। हिन्दी भावार्थ पूरे पद का है। पाठ में स्कैन से लिप्यंतरण की त्रुटियाँ रह सकती हैं। यह पाठ पुनर्वितरण की अनुमति नहीं देता।

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मूल रचना की प्रथम प्रकाशन तिथि के उपलब्ध विवरण अलग हैं; इस संग्रह में उसका कोई एक निश्चित वर्ष नहीं माना गया है। अंग्रेज़ी संस्करण का अक्टूबर २००९ का प्रथम-संस्करण वर्ष मूल रचना के प्रथम प्रकाशन का वर्ष नहीं है।
