# युगल गल बँहियन की बलिहार।

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भाषा: हिन्दी / ब्रज
स्रोत पहचान: PRM-0510-M11-K011
मूल रचना: प्रेम रस मदिरा — जगद्गुरु श्री कृपालु जी महाराज
माधुरी: युगल-माधुरी
स्थानीय पद संख्या: 11
मूल पद के स्रोत पृष्ठ: 237–237

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## मूल पद

<a id="line-1"></a>युगल गल बँहियन की बलिहार।  
<a id="line-2"></a>छवि श्रृंगार सखी! का कहनो, लजवत"छवि""श्रृंगार"।  
<a id="line-3"></a>बैठे महल युगल सिंहासन, आरति सखिन उतार।  
<a id="line-4"></a>कबहुँक लखत सखिन कहँ कबहुँक, एकहिं एक निहार।  
<a id="line-5"></a>लखतहिं बनत युगल मुसकनि छवि, अगनित"छवि"छवि वार।  
<a id="line-6"></a>कहत “कृपालु” निहार बार-इक, मोरेहुँ ढिंग सरकार॥

<a id="meaning"></a>
## हिन्दी भावार्थ

युगल सरकार की परस्पर गलबाहीं डाले मनोहर म्ॉँकी अनिर्वचनीय है। उनकी छवि एवं उनके श्रृंगार के विषय में इतना ही कहना पर्याप्त है कि मूर्तिमान छवि एवं युंगार भी लज्जित होते हैं। दोनों महल में सिंहासन पर पमासीन हैं एवं सखियाँ आरती उत्तार रही हैं। दोनों कभी तो र एक दूसरे को देखते हैं एवं कभी सखियों की ओर भी देख लेते हैं। युगल सरकार की प्रेम रस भीनी मधुर पुस्कान की छवि बस देखते ही बनती है। इतना ही कहना र्याप्त है कि उस छवि पर अनन्त 'छवि'की छवि न्यौछावर की जा सकती है। 'कृपालु' कहते हैं-हे युगल-सरकार!! एक शार मेरी ओर भी अपनेपन से निहार दो।

भावार्थ के स्रोत पृष्ठ: 490

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## पद का स्रोत और उद्धरण

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मूल रचना: जगद्गुरु श्री कृपालु जी महाराज। पद और उपलब्ध हिन्दी भावार्थ प्रकाशित पुस्तक के उपलब्ध स्कैन से लिए गए हैं; ये कृत्रिम बुद्धिमत्ता से रचित पद या भावार्थ नहीं हैं। माधुरी और भक्ति चैलेंज के सजावटी चित्र Codex से बनाए गए हैं। वे मूल प्रकाशित पाठ, स्कैन और प्रकाशक के चित्रों से अलग हैं। पुस्तकालय के आवरण उपलब्ध PDF के आवरण/मूल पृष्ठ या प्रकाशक के प्रतिनिधि चित्र हैं; चित्र से संस्करण की समानता सिद्ध नहीं होती।

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मूल रचना की प्रथम प्रकाशन तिथि के उपलब्ध विवरण अलग हैं; इस संग्रह में उसका कोई एक निश्चित वर्ष नहीं माना गया है। अंग्रेज़ी संस्करण का अक्टूबर २००९ का प्रथम-संस्करण वर्ष मूल रचना के प्रथम प्रकाशन का वर्ष नहीं है।
