# रास-रस रसिक रँगीली राधा।

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भाषा: हिन्दी / ब्रज
स्रोत पहचान: PRM-0477-M10-K035
मूल रचना: प्रेम रस मदिरा — जगद्गुरु श्री कृपालु जी महाराज
माधुरी: श्रीराधा-माधुरी
स्थानीय पद संख्या: 35
मूल पद के स्रोत पृष्ठ: 222–223

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## मूल पद

<a id="line-1"></a>रास-रस रसिक रँगीली राधा।  
<a id="line-2"></a>जा पद-नख-मणि-चंद्र चंद्रिकहिं, शंभु समाधिहिं साधा।  
<a id="line-3"></a>बिके श्याम बिनु दाम याम-वसु, जासु नाम आराधा।  
<a id="line-4"></a>जासु विरह विरहातुर हरिहूँ, रहि न सकत पल आधा।  
<a id="line-5"></a>नित्य विहार करति वृंदावन, कुंजनि प्रेम अगाधा।  
<a id="line-6"></a>किमि “कृपालु” तहँ रहि सक सपनेहुँ, भुक्ति -मुक्ति दुइ बाधा॥

<a id="meaning"></a>
## हिन्दी भावार्थ

श्री किशोरी जी रास-रस से विभोर रसिकों को रिझाने वाली हैं, जिनके चरण कमलों की नखमणि रूपी चन्द्रमा के प्रकाश को ब्रह्म जान कर योगीराज शम्भु सरीखे समाधि में ध्यान करते हुए निर्विकल्प रहते हैं। जिनके नाम की आराधना बिना दाम के बिके हुए, श्यामसुन्दर भी आठों याम किया करते हैं। जिनके विरह में विरही बनकर भगवान् भी आधे पल के लिए भी चैन नहीं पाते। जो अगाध प्रेम को धारण किये हुए वृन्दावन की कुंजों में नित्य विहार किया करती हैं। 'कृपालु' कहते हैं जिनके कृपा कटाक्ष को पा लेने पर स्वप्न में भी ब्रह्मलोक पर्यन्त के सुख एवं एकत्व मुक्ति अपना प्रभाव नहीं डाल सकते।

भावार्थ के स्रोत पृष्ठ: 461

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## पद का स्रोत और उद्धरण

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मूल रचना: जगद्गुरु श्री कृपालु जी महाराज। पद और उपलब्ध हिन्दी भावार्थ प्रकाशित पुस्तक के उपलब्ध स्कैन से लिए गए हैं; ये कृत्रिम बुद्धिमत्ता से रचित पद या भावार्थ नहीं हैं। माधुरी और भक्ति चैलेंज के सजावटी चित्र Codex से बनाए गए हैं। वे मूल प्रकाशित पाठ, स्कैन और प्रकाशक के चित्रों से अलग हैं। पुस्तकालय के आवरण उपलब्ध PDF के आवरण/मूल पृष्ठ या प्रकाशक के प्रतिनिधि चित्र हैं; चित्र से संस्करण की समानता सिद्ध नहीं होती।

प्रकाशक के अनुसार प्रेम रस मदिरा में २१ माधुरियों में १,००८ पद हैं। संग्रह में उपलब्ध स्रोत-अभिलेखों की स्थायी पहचान सुरक्षित रखी गई है; संख्या के अंतर का समाधान अभी लंबित है। पाँच हिन्दी भावार्थ उपलब्ध नहीं हैं। हिन्दी भावार्थ पूरे पद का है। पाठ में स्कैन से लिप्यंतरण की त्रुटियाँ रह सकती हैं। यह पाठ पुनर्वितरण की अनुमति नहीं देता।

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मूल रचना की प्रथम प्रकाशन तिथि के उपलब्ध विवरण अलग हैं; इस संग्रह में उसका कोई एक निश्चित वर्ष नहीं माना गया है। अंग्रेज़ी संस्करण का अक्टूबर २००९ का प्रथम-संस्करण वर्ष मूल रचना के प्रथम प्रकाशन का वर्ष नहीं है।
