# प्यारी तोरी, अरुण अधर-छवि न्यारी

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भाषा: हिन्दी / ब्रज
स्रोत पहचान: PRM-0464-M10-K022
मूल रचना: प्रेम रस मदिरा — जगद्गुरु श्री कृपालु जी महाराज
माधुरी: श्रीराधा-माधुरी
स्थानीय पद संख्या: 22
मूल पद के स्रोत पृष्ठ: 217–217

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## मूल पद

<a id="line-1"></a>प्यारी तोरी, अरुण अधर-छवि न्यारी  
<a id="line-2"></a>विकसित जनु बंधूक कुसुम वर, अधर ओष्ठ-लेखा री।  
<a id="line-3"></a>प्रकट साथ मुख शशि संध्या सम, शैशव यौवन प्यारी।  
<a id="line-4"></a>उदित मुखेंदु अधर-पियूष-भू, बिंब बिंब अनुहारी।  
<a id="line-5"></a>ह्लादिन्यादि-शक्ति -गणना-मिस, अधर सुरेख सँवारी।  
<a id="line-6"></a>हम “कृपालु” उपमान बिंबफल, राधा अधर विचारी॥

<a id="meaning"></a>
## हिन्दी भावार्थ

हे किशोरी जी! तुम्हारे लाल अधरों को शोभा अत्यन्त ही निराली है, मानो बंधूक का पुष्प खिला है। तुम्हारे अधरों की लालिमा उस बिम्बफल के समान है, जो अमृत को भूमि में उत्पन्न हुआ हो एवं मुखरूपी पूर्ण चन्द्रमा के हल्के प्रकाश में उस बिम्बफल का प्रतिबिम्ब पड़ रहा हो अथवा अधरों को लालिमा शिशु एवं यौवन अवस्था की उस संध्या के समान है जिस समय मुख रूपी पूर्ण चन्द्र भी खिला हो। अधरों की लालिमा में जो रेखाएँ हैं वे ही मानो ह्रादिनी आदि प्रधान शक्तियाँ हैं। 'कृपालु' कहते हैं कि हम बिम्बफल के समान राधाजी के अधरों को न कह कर राधाजी के अधर के समान कुँदरू का फल कहते हैं।

भावार्थ के स्रोत पृष्ठ: 451

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## पद का स्रोत और उद्धरण

पद और उपलब्ध भावार्थ दिए गए स्रोत से लिप्यंतरित पाठ हैं। उद्धरण में स्रोत के शब्द, विराम-चिह्न और क्रम सुरक्षित रखें; लोप को स्पष्ट चिह्नित करें। सारांश या व्याख्या को अलग से अपना भावानुवाद बताकर इसी पद का संदर्भ दें। स्रोत में पूरे पद का भावार्थ है, शब्द-दर-शब्द या पंक्ति-दर-पंक्ति अर्थ नहीं। लिप्यंतरण की त्रुटियाँ रह सकती हैं।

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मूल रचना: जगद्गुरु श्री कृपालु जी महाराज। पद और उपलब्ध हिन्दी भावार्थ प्रकाशित पुस्तक के उपलब्ध स्कैन से लिए गए हैं; ये कृत्रिम बुद्धिमत्ता से रचित पद या भावार्थ नहीं हैं। माधुरी और भक्ति चैलेंज के सजावटी चित्र Codex से बनाए गए हैं। वे मूल प्रकाशित पाठ, स्कैन और प्रकाशक के चित्रों से अलग हैं। पुस्तकालय के आवरण उपलब्ध PDF के आवरण/मूल पृष्ठ या प्रकाशक के प्रतिनिधि चित्र हैं; चित्र से संस्करण की समानता सिद्ध नहीं होती।

प्रकाशक के अनुसार प्रेम रस मदिरा में २१ माधुरियों में १,००८ पद हैं। संग्रह में उपलब्ध स्रोत-अभिलेखों की स्थायी पहचान सुरक्षित रखी गई है; संख्या के अंतर का समाधान अभी लंबित है। पाँच हिन्दी भावार्थ उपलब्ध नहीं हैं। हिन्दी भावार्थ पूरे पद का है। पाठ में स्कैन से लिप्यंतरण की त्रुटियाँ रह सकती हैं। यह पाठ पुनर्वितरण की अनुमति नहीं देता।

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मूल रचना की प्रथम प्रकाशन तिथि के उपलब्ध विवरण अलग हैं; इस संग्रह में उसका कोई एक निश्चित वर्ष नहीं माना गया है। अंग्रेज़ी संस्करण का अक्टूबर २००९ का प्रथम-संस्करण वर्ष मूल रचना के प्रथम प्रकाशन का वर्ष नहीं है।
