# धूसरि धूरि भरे हरि आवत।

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भाषा: हिन्दी / ब्रज
स्रोत पहचान: PRM-0408-M09-K020
मूल रचना: प्रेम रस मदिरा — जगद्गुरु श्री कृपालु जी महाराज
माधुरी: श्रीकृष्ण-माधुरी
स्थानीय पद संख्या: 20
मूल पद के स्रोत पृष्ठ: 192–192

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## मूल पद

<a id="line-1"></a>धूसरि धूरि भरे हरि आवत।  
<a id="line-2"></a>मोर मुकुट कटि कछनी काछे, मुरली मधुर बजावत।  
<a id="line-3"></a>धुनि सुनि वेनु सबै ब्रजबनिता, देखन को जुरि धावत।  
<a id="line-4"></a>काँधे लकुटि कामरी कारी, लट उरझी मन भावत।  
<a id="line-5"></a>वत्स-प्रेम रस पूरि सुरभि थन, मेदिनि क्षीर चुवावत।  
<a id="line-6"></a>सो “कृपालु” झाँकी झाँकन हित, शंभु समाधि भुलावत॥

<a id="meaning"></a>
## हिन्दी भावार्थ

(सांयकाल के समय गायों को चराकर लौटते हुए श्रीकृष्ण की अनुपम झाँकी।) गायों के पैरों से उड़ी हुई धूल से युक्त श्रीकृष्ण आ रहे हैं। कमर में सुन्दर काछनी काछे हुए हैं। मुरली बजा रहे हैं। पमस्त ब्रज गोपांगनायें (जो एक क्षण के लिए भी श्रीकृष्ण से केया है।) अत्यन्त आतुर होकर श्यामसुन्दर के दर्शनार्थ अपने रों से भागकर इकट्टी हो गई हैं। लठिया है, दूसरे कंधे पर काला कंबल है, घुंघराले बाल उलझे हुए हठात् मन को मुग्ध कर रहे हैं। के वात्सल्य प्रेम रस में विभोर अपने थनों से पृथ्वी पर स्वाभाविक ही दूध चुआती हुई चली आ रही हैं। हैं कि गायों से युक्त गोपाल की इस बाँकी झाँकी क देखने के लिए भगवान् शंकर भी बरबस अपनी निर्विकल्प समाधि को भूल जाते हैं।

भावार्थ के स्रोत पृष्ठ: 406-407

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## पद का स्रोत और उद्धरण

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मूल रचना: जगद्गुरु श्री कृपालु जी महाराज। पद और उपलब्ध हिन्दी भावार्थ प्रकाशित पुस्तक के उपलब्ध स्कैन से लिए गए हैं; ये कृत्रिम बुद्धिमत्ता से रचित पद या भावार्थ नहीं हैं। माधुरी और भक्ति चैलेंज के सजावटी चित्र Codex से बनाए गए हैं। वे मूल प्रकाशित पाठ, स्कैन और प्रकाशक के चित्रों से अलग हैं। पुस्तकालय के आवरण उपलब्ध PDF के आवरण/मूल पृष्ठ या प्रकाशक के प्रतिनिधि चित्र हैं; चित्र से संस्करण की समानता सिद्ध नहीं होती।

प्रकाशक के अनुसार प्रेम रस मदिरा में २१ माधुरियों में १,००८ पद हैं। संग्रह में उपलब्ध स्रोत-अभिलेखों की स्थायी पहचान सुरक्षित रखी गई है; संख्या के अंतर का समाधान अभी लंबित है। पाँच हिन्दी भावार्थ उपलब्ध नहीं हैं। हिन्दी भावार्थ पूरे पद का है। पाठ में स्कैन से लिप्यंतरण की त्रुटियाँ रह सकती हैं। यह पाठ पुनर्वितरण की अनुमति नहीं देता।

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मूल रचना की प्रथम प्रकाशन तिथि के उपलब्ध विवरण अलग हैं; इस संग्रह में उसका कोई एक निश्चित वर्ष नहीं माना गया है। अंग्रेज़ी संस्करण का अक्टूबर २००९ का प्रथम-संस्करण वर्ष मूल रचना के प्रथम प्रकाशन का वर्ष नहीं है।
