# चपल तोरि, चितवनि की बलि जाउँ।

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भाषा: हिन्दी / ब्रज
स्रोत पहचान: PRM-0398-M09-K010
मूल रचना: प्रेम रस मदिरा — जगद्गुरु श्री कृपालु जी महाराज
माधुरी: श्रीकृष्ण-माधुरी
स्थानीय पद संख्या: 10
मूल पद के स्रोत पृष्ठ: 188–188

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## मूल पद

<a id="line-1"></a>चपल तोरि, चितवनि की बलि जाउँ।  
<a id="line-2"></a>देखतहूँ नहिं देखत पुनि पुनि, देखन कहँ ललचाउँ।  
<a id="line-3"></a>चुवत प्रेम-पीयूष निरंतर, पियत न नेकु अघाउँ।  
<a id="line-4"></a>दृग सोइ श्रीपति के यद्यपि पै, तेहि लखि नहिं सुख पाउँ।  
<a id="line-5"></a>मुखहूँ सोइ श्रीपति के पै नहिं, मृदु मुसकनि मन भाउँ।  
<a id="line-6"></a>जब लौं मिलइ “कृपालु” सिता क्यों? तब लौं हौं गुड़ खाउँ॥

<a id="meaning"></a>
## हिन्दी भावार्थ

पर बलिहार जाता हूँ। बार-बार देखने पर भी ऐसा प्रतीत होता है कि अभी नहीं देखा है क्योंकि देखने की पिपासा प्रतिक्षण बढ़ती जाती है। तुम्हारे नेत्रों से निरन्तर प्रेमामृत चूता रहता है जिसे सदा पीने पर भी तृप्ति नहीं होती। यद्यपि तुम्हारे समान ही सुन्दर एवं निर्मल नेत्र भगवान् महाविष्णु के हैं किन्तु उन्हें देखकर ऐसा सुख नहीं मिलता। यद्यपि तुम्हारे ही मुख के समान महाविष्णु का भी मुख है किन्तु उनकी मधुर मुस्कान से मन मुग्ध नहीं होता। 'कृपालु' कहते हैं कि दोनों एक तत्त्व होते हुए भी जब तक मिश्री मिलती है गुड़ खाने को जी नहीं करता।

भावार्थ के स्रोत पृष्ठ: 398-399

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## पद का स्रोत और उद्धरण

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मूल रचना: जगद्गुरु श्री कृपालु जी महाराज। पद और उपलब्ध हिन्दी भावार्थ प्रकाशित पुस्तक के उपलब्ध स्कैन से लिए गए हैं; ये कृत्रिम बुद्धिमत्ता से रचित पद या भावार्थ नहीं हैं। माधुरी और भक्ति चैलेंज के सजावटी चित्र Codex से बनाए गए हैं। वे मूल प्रकाशित पाठ, स्कैन और प्रकाशक के चित्रों से अलग हैं। पुस्तकालय के आवरण उपलब्ध PDF के आवरण/मूल पृष्ठ या प्रकाशक के प्रतिनिधि चित्र हैं; चित्र से संस्करण की समानता सिद्ध नहीं होती।

प्रकाशक के अनुसार प्रेम रस मदिरा में २१ माधुरियों में १,००८ पद हैं। संग्रह में उपलब्ध स्रोत-अभिलेखों की स्थायी पहचान सुरक्षित रखी गई है; संख्या के अंतर का समाधान अभी लंबित है। पाँच हिन्दी भावार्थ उपलब्ध नहीं हैं। हिन्दी भावार्थ पूरे पद का है। पाठ में स्कैन से लिप्यंतरण की त्रुटियाँ रह सकती हैं। यह पाठ पुनर्वितरण की अनुमति नहीं देता।

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मूल रचना की प्रथम प्रकाशन तिथि के उपलब्ध विवरण अलग हैं; इस संग्रह में उसका कोई एक निश्चित वर्ष नहीं माना गया है। अंग्रेज़ी संस्करण का अक्टूबर २००९ का प्रथम-संस्करण वर्ष मूल रचना के प्रथम प्रकाशन का वर्ष नहीं है।
