# अनुपम रूप नीलमणि को री।

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भाषा: हिन्दी / ब्रज
स्रोत पहचान: PRM-0389-M09-K001
मूल रचना: प्रेम रस मदिरा — जगद्गुरु श्री कृपालु जी महाराज
माधुरी: श्रीकृष्ण-माधुरी
स्थानीय पद संख्या: 1
मूल पद के स्रोत पृष्ठ: 184–184

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## मूल पद

<a id="line-1"></a>अनुपम रूप नीलमणि को री।  
<a id="line-2"></a>उर धरि कर करि हाय! गिरत सोइ, लखत बार इक भूलेहुँ जो री।  
<a id="line-3"></a>प्रति अंगनि छवि कोटि अनंगनि, सुषमा-सुधा-सार-रस बोरी।  
<a id="line-4"></a>जिनहिंन अंगनि नैनन निरखत, तिनहिंन कहँ कह सरस बड़ो री।  
<a id="line-5"></a>नखशिख लखि सखि अँखियन हूँ ते, पलपल तलफति देखन को री।  
<a id="line-6"></a>कह “कृपालु” गागर महँ सागर, आव न यतन करोर करो री॥

<a id="meaning"></a>
## हिन्दी भावार्थ

नीलमणि श्यामसुन्दर के सौन्दर्य का वर्णन सर्वथा अनिर्वचनीय है। जो भी, भूलकर भी, एक-बार भी, उस रूपमाधुरी का दर्शन कर लेता है वह हृदय पर हाथ रखकर एवं हाय! कह कर मूर्च्छित होकर गिर पड़ता है। उनके प्रत्येक अंगों की रूपमाधुरी पर करोड़ों कामदेव न्यौछावर हैं। ऐसी उनकी छवि सौन्दर्य के अमृत के सार के रस में डुबोई हुई है। एक विलक्षणता यह भी है-उनके नख से शिख तक समस्त अंगों को आँखों से देखकर भी तृप्ति नहीं होती है। उनके जिन अंगों को आँख देखती है उन्हीं अंगों को और अंगों से अधिक सरस अनुभव करती है। आँखें प्रतिक्षण पुनः पुनः देखने को तड़पती ही रहती हैं। 'कृपालु' कहते हैं कि प्राकृत इन्द्रिय मन बुद्धि रूपी घड़े में दिव्यानन्द रूपी समुद्र नहीं समा सकता, भले ही कोई करोड़ों प्रयत्न क्यों न करे।

भावार्थ के स्रोत पृष्ठ: 391-392
स्रोत से सत्यापित सुधार: prm-hi-0389-2026-10-20; संस्करण 2026-10-20.1; मुद्रित पृष्ठ 338, 339; स्रोत SHA-256 8b0268795193809e371f6213e468aa2e2377e6f33defdfd23c321e719d974786।

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## पद का स्रोत और उद्धरण

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मूल रचना: जगद्गुरु श्री कृपालु जी महाराज। पद और उपलब्ध हिन्दी भावार्थ प्रकाशित पुस्तक के उपलब्ध स्कैन से लिए गए हैं; ये कृत्रिम बुद्धिमत्ता से रचित पद या भावार्थ नहीं हैं। माधुरी और भक्ति चैलेंज के सजावटी चित्र Codex से बनाए गए हैं। वे मूल प्रकाशित पाठ, स्कैन और प्रकाशक के चित्रों से अलग हैं। पुस्तकालय के आवरण उपलब्ध PDF के आवरण/मूल पृष्ठ या प्रकाशक के प्रतिनिधि चित्र हैं; चित्र से संस्करण की समानता सिद्ध नहीं होती।

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मूल रचना की प्रथम प्रकाशन तिथि के उपलब्ध विवरण अलग हैं; इस संग्रह में उसका कोई एक निश्चित वर्ष नहीं माना गया है। अंग्रेज़ी संस्करण का अक्टूबर २००९ का प्रथम-संस्करण वर्ष मूल रचना के प्रथम प्रकाशन का वर्ष नहीं है।
