# कुँवरि रहिं, कीरति सों विरुझाय।

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भाषा: हिन्दी / ब्रज
स्रोत पहचान: PRM-0376-M08-K011
मूल रचना: प्रेम रस मदिरा — जगद्गुरु श्री कृपालु जी महाराज
माधुरी: श्री राधा-बाल लीला-माधुरी
स्थानीय पद संख्या: 11
मूल पद के स्रोत पृष्ठ: 176–177

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## मूल पद

<a id="line-1"></a>कुँवरि रहिं, कीरति सों विरुझाय।  
<a id="line-2"></a>"ऊँ ऊँ"करि झगरति झकझोरति, मैया बलि बलि जाय।  
<a id="line-3"></a>पग पटकति, मटकति, गर लटकति, कह कछु मुख लटकाय।  
<a id="line-4"></a>वा बाँकी झाँकी झांकन हित, शंभु समाधि भुलाय।  
<a id="line-5"></a>कही माय"बतराय बात का?"कहीं कुँवरि तुतराय।  
<a id="line-6"></a>एँड़ी लौं वेणी कब ह्वैहैं, तो सम मो बतराय।  
<a id="line-7"></a>कही माय, अरि कुँवरि अबहिं तू, पाँच बरस की आय।  
<a id="line-8"></a>जब तू होय बड़ी तब वेणिहुँ, बड़ी होयगी वाय।  
<a id="line-9"></a>कुँवरि कही, मैया! मोहिं अबहीं, दे ना बड़ी बनाय।  
<a id="line-10"></a>दउँ बनाय जो बड़ी, माय कह, तो केहि गोद खिलाय।  
<a id="line-11"></a>सुनि “कृपालु” यह कुँवरि किलकि गई, माय कंठ लिपटाय॥

<a id="meaning"></a>
## हिन्दी भावार्थ

छोरी-सी किशोरी जी कीर्ति मैया से मचल रही हैं। ऊँ-ऊँ करके झकझोरती हुई झगड़ रही हैं। मैया लली के इस अनूठे व्यवहार पर बलिहार जा रही हैं। किशोरी जी मरकती हुई पैर पटकती हैं, मैया के गले लटकती हैं एवं मुँह मटका कर कुछ कहती हैं। किशोरी जी की इस बाललीला सम्बन्धी मान-माधुरी की झाँकी के लिए भगवान् शंकर अपनी समाधि भुला देते हैं। अस्तु, मैया ने पूछा ''अरी लाली! बात क्या है?''किशोरी जी ने तुतलाकर कहा-''अरी मैया! तेरी सी ऐड़ी पर्यन्त लम्बी मेरी वेणी कब होगी?''मैया ने कहा-'अरी लाली! अभी तो तू पाँच बरस की है जब तू मेरे बराबर बड़ी हो जायगी तो तेरी वेणी भी मेरे बराबर बड़ी हो जायगी।'मैया ने कहा-'अरी लाली! जो अभी मैं तुझको बड़ी बना दूँगी तो फिर किसको गोद में खिलाऊँगी'। 'कृपालु' कहते हैं कि किशोरी जी यह सुनकर आनन्द-विभोर होकर किलकारी मारकर मैया के गले से लिपट गयीं।

भावार्थ के स्रोत पृष्ठ: 377-378

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## पद का स्रोत और उद्धरण

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मूल रचना की प्रथम प्रकाशन तिथि के उपलब्ध विवरण अलग हैं; इस संग्रह में उसका कोई एक निश्चित वर्ष नहीं माना गया है। अंग्रेज़ी संस्करण का अक्टूबर २००९ का प्रथम-संस्करण वर्ष मूल रचना के प्रथम प्रकाशन का वर्ष नहीं है।
