# भानुभूप-घर बजत बधाई।

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भाषा: हिन्दी / ब्रज
स्रोत पहचान: PRM-0368-M08-K003
मूल रचना: प्रेम रस मदिरा — जगद्गुरु श्री कृपालु जी महाराज
माधुरी: श्री राधा-बाल लीला-माधुरी
स्थानीय पद संख्या: 3
मूल पद के स्रोत पृष्ठ: 173–173

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## मूल पद

<a id="line-1"></a>भानुभूप-घर बजत बधाई।  
<a id="line-2"></a>प्रकटीं अंक लली कीरति के, देव वृंद दुंदुभिहिं बजाई।  
<a id="line-3"></a>सब विधि सज्यो आजु बरसानो, लखि कोटिन बैकुँठ लजाई।  
<a id="line-4"></a>चहुँ दिशि विविध बाजने बाजत, परत न कहुँ कछु शब्द सुनाई।  
<a id="line-5"></a>भरिभरि मूठि मणिन मोतिन की, यद्यपि कीरति मातु लुटाई।  
<a id="line-6"></a>तदपि न लूटनि की सुधि काहुहिं, सबै विदेह, देह पद पाई।  
<a id="line-7"></a>विधि हरि हर सुर कहत एक सुर, जय जय ह्लादिनि शक्ति सुहाई।  
<a id="line-8"></a>करत “कृपालु” निछावर तापर, निज कर कोटि ब्रह्म सुख जाई॥

<a id="meaning"></a>
## हिन्दी भावार्थ

श्री वृषभानुनन्दिनी के जन्मोत्सव के उपलक्ष्य में वृषभानु राजा के महल में बधाई बज रही है। कीर्ति की गोदी में श्री किशोरी जी का प्राकट्य हुआ है। अतएव आनन्द विभोर होकर समस्त देवता दुंदुभी बजा रहे हैं। श्री बरसाना धाम सभी प्रकार से सजा हुआ है, जिसकी सजावट को देखकर करोड़ों बैकुंठ भी लज्जित होते हैं। चारों ओर अनेक प्रकार के बाजे बज रहे हैं, जिनके तुमुल स्वर में किसी व्यक्ति के बोले हुए शब्द, कोई भी नहीं सुन पा रहा है। आनन्दातिरेक से कीर्ति माता यद्यपि मणियों एवं मोतियों को दोनों हाथों की मुट्टियों में भर-भर कर लुटा रही हैं, फिर भी एक भी व्यक्ति को उन मणियों एवं मोतियों को लूटने की सुधि ही नहीं है। ने विदेह पद पा लिया है। देवतागण एक स्वर से "'श्री ह्रदिनी शक्ति की जय हो ह्रादिनी शक्ति को जय हो ''ऐसा नारा लगा रहे हैं। कहते हैं कि हम भी उपर्युक्त जन्म दिवस के आनन्द के ऊपर अपने ही हाथों करोड़ों ब्रह्मानन्द न्यौछावर करके फेंक रहे हैं।

भावार्थ के स्रोत पृष्ठ: 370-371

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## पद का स्रोत और उद्धरण

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मूल रचना: जगद्गुरु श्री कृपालु जी महाराज। पद और उपलब्ध हिन्दी भावार्थ प्रकाशित पुस्तक के उपलब्ध स्कैन से लिए गए हैं; ये कृत्रिम बुद्धिमत्ता से रचित पद या भावार्थ नहीं हैं। माधुरी और भक्ति चैलेंज के सजावटी चित्र Codex से बनाए गए हैं। वे मूल प्रकाशित पाठ, स्कैन और प्रकाशक के चित्रों से अलग हैं। पुस्तकालय के आवरण उपलब्ध PDF के आवरण/मूल पृष्ठ या प्रकाशक के प्रतिनिधि चित्र हैं; चित्र से संस्करण की समानता सिद्ध नहीं होती।

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मूल रचना की प्रथम प्रकाशन तिथि के उपलब्ध विवरण अलग हैं; इस संग्रह में उसका कोई एक निश्चित वर्ष नहीं माना गया है। अंग्रेज़ी संस्करण का अक्टूबर २००९ का प्रथम-संस्करण वर्ष मूल रचना के प्रथम प्रकाशन का वर्ष नहीं है।
