# लाल तुम नाहक गाल बजाय।

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भाषा: हिन्दी / ब्रज
स्रोत पहचान: PRM-0360-M07-K092
मूल रचना: प्रेम रस मदिरा — जगद्गुरु श्री कृपालु जी महाराज
माधुरी: श्री कृष्ण-बाल लीला-माधुरी
स्थानीय पद संख्या: 92
मूल पद के स्रोत पृष्ठ: 168–168

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## मूल पद

<a id="line-1"></a>लाल तुम नाहक गाल बजाय।  
<a id="line-2"></a>तुम कहँ ब्याहि कौन निज हाथहिं, बेटिहिं कूप डुबाय।  
<a id="line-3"></a>अकड़ि हँकड़ि श्रीदामादिक सों, झगरत रहत सदाय।  
<a id="line-4"></a>ब्रज वीथिन ललितादि सखिन सों, करि करि रार खिझाय।  
<a id="line-5"></a>ब्रज वासिन आबाल वृद्ध सब, जानत तव गुन आय।  
<a id="line-6"></a>कह “कृपालु” पुनि मात पितहुँ की, कतहूँ साख न पाय॥

<a id="meaning"></a>
## हिन्दी भावार्थ

एक सखि बालकृष्ण को चिढ़ाती हुई कहती है-''अरे कौन पिता अपनी बेटी को अपने हाथों कुएँ में फेंकेगा? फिर तुम्हारी करतूत यह है कि श्रीदामा आदि समस्त सखा मण्डल से झगड़ते रहते हो। ब्रज की गलियों में ब्रजांगनाओं को भी कष्ट दे-देकर अपना शत्रु बना लिया है। ब्रज के चौरासी कोस में बच्चों से लेकर तल क तक सब तुम्हारी काली करतूतों से परिचित हैं।''इतने में 'कृपालु' कहते हैं ''अरी सखि! सबसे बड़ी बात तो यह है कि जिसके माता-पिता का ठीक पता न हो उससे कोई मूर्ख पिता भी अपनी बेटी का ब्याह नहीं करता।

भावार्थ के स्रोत पृष्ठ: 351-352

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## पद का स्रोत और उद्धरण

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मूल रचना: जगद्गुरु श्री कृपालु जी महाराज। पद और उपलब्ध हिन्दी भावार्थ प्रकाशित पुस्तक के उपलब्ध स्कैन से लिए गए हैं; ये कृत्रिम बुद्धिमत्ता से रचित पद या भावार्थ नहीं हैं। माधुरी और भक्ति चैलेंज के सजावटी चित्र Codex से बनाए गए हैं। वे मूल प्रकाशित पाठ, स्कैन और प्रकाशक के चित्रों से अलग हैं। पुस्तकालय के आवरण उपलब्ध PDF के आवरण/मूल पृष्ठ या प्रकाशक के प्रतिनिधि चित्र हैं; चित्र से संस्करण की समानता सिद्ध नहीं होती।

प्रकाशक के अनुसार प्रेम रस मदिरा में २१ माधुरियों में १,००८ पद हैं। संग्रह में उपलब्ध स्रोत-अभिलेखों की स्थायी पहचान सुरक्षित रखी गई है; संख्या के अंतर का समाधान अभी लंबित है। पाँच हिन्दी भावार्थ उपलब्ध नहीं हैं। हिन्दी भावार्थ पूरे पद का है। पाठ में स्कैन से लिप्यंतरण की त्रुटियाँ रह सकती हैं। यह पाठ पुनर्वितरण की अनुमति नहीं देता।

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मूल रचना की प्रथम प्रकाशन तिथि के उपलब्ध विवरण अलग हैं; इस संग्रह में उसका कोई एक निश्चित वर्ष नहीं माना गया है। अंग्रेज़ी संस्करण का अक्टूबर २००९ का प्रथम-संस्करण वर्ष मूल रचना के प्रथम प्रकाशन का वर्ष नहीं है।
