# मोहन! मोहिं न आँखि दिखायो।

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भाषा: हिन्दी / ब्रज
स्रोत पहचान: PRM-0358-M07-K090
मूल रचना: प्रेम रस मदिरा — जगद्गुरु श्री कृपालु जी महाराज
माधुरी: श्री कृष्ण-बाल लीला-माधुरी
स्थानीय पद संख्या: 90
मूल पद के स्रोत पृष्ठ: 167–167

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## मूल पद

<a id="line-1"></a>मोहन! मोहिं न आँखि दिखायो।  
<a id="line-2"></a>हटु जी लँगर करि झगर डगर महँ, माखन चाहत खायो।  
<a id="line-3"></a>हौं राधे बरसाने वारी, पितु वृषभानु कहायो।  
<a id="line-4"></a>भाजि जाहु अब बेगि ग्वाल लै, जनि मोय रिस लगवायो।  
<a id="line-5"></a>ढोर चरावत सब दिन बीतत, चाहत मोहिं चरायो।  
<a id="line-6"></a>बिनु पितु मातु रूप कारो अति, जाति अहीर जतायो।  
<a id="line-7"></a>सुनि रिसाय ग्वालन सैनन दै, बरबस दधि लुटवायो।  
<a id="line-8"></a>सखी विशाखा खीझि श्याम सिर, दधि मटुकी ढुरकायो।  
<a id="line-9"></a>तब “कृपालु” बलि संग सखिन के, हँसि हँसि ताल बजायो॥

<a id="meaning"></a>
## हिन्दी भावार्थ

(बरसाने की साँकरी-गली में राधिका जी से बरबस मक्खन माँगते हुए श्रीकृष्ण का वाद-विवाद।) राधिका जी कहती हैं; 'हे मोहन! मुझे आँख दिखाकर धौंस जतलाने का प्रयत्न मत करना। मार्ग से हट जाओ, झगड़ा करके बरबस मक्खन नहीं पा सकते। तुम कदाचित् यह नहीं जानते कि मैं बरसाने में रहने वाली वृषभानु की बेरी राधिका हूँ। अब तुम्हारी कुशल इसी में है कि शीघ्र ही समस्त ग्वालों को लेकर भाग जाओ। मुझे क्रोध न दिलाओ। सदा से ढोरों को चराते रहे हो, इसी से कदाचित् धौंस बताकर मुझे भी चराना चाहते हो? तुम्हारी वास्तविकता कौन नहीं जानता? तुम्हारे माँ-बाप का पता नहीं है। शरीर का रंग अत्यन्त ही काला है एवं जाति भी अहीर की है।'यह सुनकर श्रीकृष्ण क्रुद्ध हो गये एवं सखाओं को संकेत किया कि मक्खन लूट लो। श्रीकृष्ण के संकेतानुसार सखाओं ने समस्त गोपांगनाओं का दही और मक्खन लूट लिया। इतने में ही अत्यन्त चतुर सखि विशाखा ने खीझकर श्रीकृष्ण के सिर पर पूरी दही से भरी मटुकी ढुलका दी, ताकि जिधर भी जायँ, अपराध स्पष्ट रूप से दिखाई पड़े। कृपालु' कहते हैं कि श्रीकृष्ण को दही में सराबोर देखकर हम सखियों के साथ ताली बजा-बजा हँसने लगे एवं श्रीकृष्ण खिसियाने से रह गये।

भावार्थ के स्रोत पृष्ठ: 349-350

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## पद का स्रोत और उद्धरण

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मूल रचना की प्रथम प्रकाशन तिथि के उपलब्ध विवरण अलग हैं; इस संग्रह में उसका कोई एक निश्चित वर्ष नहीं माना गया है। अंग्रेज़ी संस्करण का अक्टूबर २००९ का प्रथम-संस्करण वर्ष मूल रचना के प्रथम प्रकाशन का वर्ष नहीं है।
