# माय ले, निज लालहिं समुझाय।

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भाषा: हिन्दी / ब्रज
स्रोत पहचान: PRM-0352-M07-K084
मूल रचना: प्रेम रस मदिरा — जगद्गुरु श्री कृपालु जी महाराज
माधुरी: श्री कृष्ण-बाल लीला-माधुरी
स्थानीय पद संख्या: 84
मूल पद के स्रोत पृष्ठ: 164–164

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## मूल पद

<a id="line-1"></a>माय ले, निज लालहिं समुझाय।  
<a id="line-2"></a>हौं पनघट घट भरन गई रहि, साँकरि द्वार चढ़ाय।  
<a id="line-3"></a>झटपट खोलि कपाटनि नटखट, भीतर पहुँच्यो जाय।  
<a id="line-4"></a>खाय अघाय माय! पुनि माखन, मटुकिहुँ दिय ढुरकाय।  
<a id="line-5"></a>वा दिन हौं झटपट घट भरि घर, आय अचानक माय।  
<a id="line-6"></a>मोहिं लखि कह"सखि आइ बिलैया, गइ माखन सब खाय"।  
<a id="line-7"></a>देखु “कृपालु” मातु! यह ढोटा, केतिक बात बनाय॥

<a id="meaning"></a>
## हिन्दी भावार्थ

एक सखि मैया यशोदा से कन्हैया सम्बन्धी उलाहना देती हुई कहती है, ''मैया! अपने लाला को समझा ले। मैं दरवाजे की साँकल चढ़ा कर पानी भरने गयी थी, उसी बीच इस नटखट ने बेधड़क किवाड़ खोल कर भीतर प्रवेश किया। पेट भरकर मक्खन खाया एवं बचे हुए मक्खन को जमीन पर गिरा भी दिया। अचानक उस दिन मैं पानी भरकर शीघ्र ही घर आ गयी तो मुझे देख कर इस छोटे से छोरा ने बात बनाते हुए कहा-''अरी सखि! तेरा मक्खन बिल्ली खा गयी।'''कृपालु के शब्दों में सखि कहती है-''अरी मैया! देख तो, यह छोटा सा लड़का कितनी बातें बना लेता है?

भावार्थ के स्रोत पृष्ठ: 344

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## पद का स्रोत और उद्धरण

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मूल रचना: जगद्गुरु श्री कृपालु जी महाराज। पद और उपलब्ध हिन्दी भावार्थ प्रकाशित पुस्तक के उपलब्ध स्कैन से लिए गए हैं; ये कृत्रिम बुद्धिमत्ता से रचित पद या भावार्थ नहीं हैं। माधुरी और भक्ति चैलेंज के सजावटी चित्र Codex से बनाए गए हैं। वे मूल प्रकाशित पाठ, स्कैन और प्रकाशक के चित्रों से अलग हैं। पुस्तकालय के आवरण उपलब्ध PDF के आवरण/मूल पृष्ठ या प्रकाशक के प्रतिनिधि चित्र हैं; चित्र से संस्करण की समानता सिद्ध नहीं होती।

प्रकाशक के अनुसार प्रेम रस मदिरा में २१ माधुरियों में १,००८ पद हैं। संग्रह में उपलब्ध स्रोत-अभिलेखों की स्थायी पहचान सुरक्षित रखी गई है; संख्या के अंतर का समाधान अभी लंबित है। पाँच हिन्दी भावार्थ उपलब्ध नहीं हैं। हिन्दी भावार्थ पूरे पद का है। पाठ में स्कैन से लिप्यंतरण की त्रुटियाँ रह सकती हैं। यह पाठ पुनर्वितरण की अनुमति नहीं देता।

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मूल रचना की प्रथम प्रकाशन तिथि के उपलब्ध विवरण अलग हैं; इस संग्रह में उसका कोई एक निश्चित वर्ष नहीं माना गया है। अंग्रेज़ी संस्करण का अक्टूबर २००९ का प्रथम-संस्करण वर्ष मूल रचना के प्रथम प्रकाशन का वर्ष नहीं है।
