# लली सँग खेलत बाल गुपाल।

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भाषा: हिन्दी / ब्रज
स्रोत पहचान: PRM-0301-M07-K033
मूल रचना: प्रेम रस मदिरा — जगद्गुरु श्री कृपालु जी महाराज
माधुरी: श्री कृष्ण-बाल लीला-माधुरी
स्थानीय पद संख्या: 33
मूल पद के स्रोत पृष्ठ: 139–139

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## मूल पद

<a id="line-1"></a>लली सँग खेलत बाल गुपाल।  
<a id="line-2"></a>खेलन के पूरब नटखट ने, चली अटपटी चाल।  
<a id="line-3"></a>कह्यो लाल"जो खेलहिं हारे, दाउँ देय ततकाल।  
<a id="line-4"></a>तुम हारो तो ब्याहु करहु मोहिं, जो हौं तो तोहिं बाल।  
<a id="line-5"></a>जानि सकीं नहिं भानुदुलारी, कूट चाल नँदलाल।  
<a id="line-6"></a>कह “कृपालु” मन ही मन धनिधनि, मायापति को जाल॥

<a id="meaning"></a>
## हिन्दी भावार्थ

छोटे से श्यामसुन्दर छोटी सी किशोरी जी के साथ ल रहे हैं। खेल प्रारम्भ होने के पूर्व ही छलिया श्यामसुन्दर अपनी सनातन अटपटी चाल से कहा कि देखो भाई! खेल जो भी हारे उसे तत्काल दाँब देना पड़ेगा। दाँव यह रखा है म यदि तुम हारोगी तो तुम्हें मुझ से ब्याह करना पड़ेगा और दि मैं हारूँगा तो मैं तुमसे ब्याह करूँगा। नों प्रकार से हमारा तुम्हारा ब्याह हो जायगा) श्यामसुन्दर। इस चतुराई को भोरी भारी भानुदुलारी नहीं समझ सकी र उन्होंने खेल खेलना स्वीकार कर लिया। मन मायापति भगवान् के जाल की प्रशंसा करते हुए धन्य य कहते हैं।

भावार्थ के स्रोत पृष्ठ: 296

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## पद का स्रोत और उद्धरण

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मूल रचना: जगद्गुरु श्री कृपालु जी महाराज। पद और उपलब्ध हिन्दी भावार्थ प्रकाशित पुस्तक के उपलब्ध स्कैन से लिए गए हैं; ये कृत्रिम बुद्धिमत्ता से रचित पद या भावार्थ नहीं हैं। माधुरी और भक्ति चैलेंज के सजावटी चित्र Codex से बनाए गए हैं। वे मूल प्रकाशित पाठ, स्कैन और प्रकाशक के चित्रों से अलग हैं। पुस्तकालय के आवरण उपलब्ध PDF के आवरण/मूल पृष्ठ या प्रकाशक के प्रतिनिधि चित्र हैं; चित्र से संस्करण की समानता सिद्ध नहीं होती।

प्रकाशक के अनुसार प्रेम रस मदिरा में २१ माधुरियों में १,००८ पद हैं। संग्रह में उपलब्ध स्रोत-अभिलेखों की स्थायी पहचान सुरक्षित रखी गई है; संख्या के अंतर का समाधान अभी लंबित है। पाँच हिन्दी भावार्थ उपलब्ध नहीं हैं। हिन्दी भावार्थ पूरे पद का है। पाठ में स्कैन से लिप्यंतरण की त्रुटियाँ रह सकती हैं। यह पाठ पुनर्वितरण की अनुमति नहीं देता।

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मूल रचना की प्रथम प्रकाशन तिथि के उपलब्ध विवरण अलग हैं; इस संग्रह में उसका कोई एक निश्चित वर्ष नहीं माना गया है। अंग्रेज़ी संस्करण का अक्टूबर २००९ का प्रथम-संस्करण वर्ष मूल रचना के प्रथम प्रकाशन का वर्ष नहीं है।
