# गोद-हित झगरत सुंदर श्याम।

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भाषा: हिन्दी / ब्रज
स्रोत पहचान: PRM-0299-M07-K031
मूल रचना: प्रेम रस मदिरा — जगद्गुरु श्री कृपालु जी महाराज
माधुरी: श्री कृष्ण-बाल लीला-माधुरी
स्थानीय पद संख्या: 31
मूल पद के स्रोत पृष्ठ: 138–138

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## मूल पद

<a id="line-1"></a>गोद-हित झगरत सुंदर श्याम।  
<a id="line-2"></a>अंबर पकरि महरि को दृग झरि, लावत पटकत पाम।  
<a id="line-3"></a>अति अधीर मुख-मातु लखत सो, जाति करन गृह काम।  
<a id="line-4"></a>कर सों कर अंबरहिं छुटावति, करति हाय, ब्रज बाम।  
<a id="line-5"></a>इमि दोउ लरत लखत मुनि नारद, ठड़े ठगे तेहि ठाम।  
<a id="line-6"></a>नारद चकित कहत"धनि भामिनि, धनि धनि गोकुल ग्राम"।  
<a id="line-7"></a>कत “कृपालु” इतराति नंद कह, लै ले री सुखधाम॥

<a id="meaning"></a>
## हिन्दी भावार्थ

(मैया किसी गृहकार्य के लिये घर जा रही है। बालकृष्ण चाहते हैं कि मैया मुझे गोद में लेले, इस विषय में माँ-बेटे का प्रेम-युद्ध हो रहा है।) बालकृष्ण मैया की गोद में जाने के लिए झगड़ रहे हैं। मैया खड़ी है, बालकृष्ण उनके कपड़े पकड़े हुए, पैर पटकते हुए, आँखों से आँसुओं की झड़ी लगाते हुए रो रहे हैं एवं अत्यन्त अधीर होकर मैया के मुख की ओर देख रहे हैं (ताकि मैया पुत्रकी आँख से आँख मिलाकर वात्सल्य प्रेम में विभोर होकर श्रीकृष्ण को गोद में ले ले) किन्तु मैया किसी आवश्यक कार्य से घर जाना चाहती है। अतएव मैया अपने हाथ से अपने लाल के हाथ को अपने कपड़े से बार-बार छुड़ाने का प्रयत्न करती है, जिसे देखकर ब्रज-गोपियाँ कहती हैं-हाय! हाय! मैया लाला को क्यों रुला रही है? गोद में ले ले। इस प्रकार इन दोनों को वात्सल्य प्रेम में लड़ते हुए देवर्षि नारद ने भी देखा-यों देखकर किंकर्तव्यविमूढ़ से होकर ठगे से वहीं खड़े रह गये। (नारदजी को आश्चर्य यह था कि ब्रह्म जीव की गोद में जाना चाहता है किन्तु जीव उसे डाँट रहा है। धन्य है इस वात्सल्य-प्रेम को!) नारद जी आश्चर्य में पड़कर कहते हैं मैया तुझको धन्य है एवं इस गोकुल ग्राम को भी धन्य है, जहाँ यह अलभ्य रस लुट रहा है।''कृपालु' कहते हैं कि इतने में ही नन्दजी आ गये और उन्होंने कहा कि अरी! क्यों बहुत इतरा रही है। लाला को ले ले ना, काम फिर कर लेना।

भावार्थ के स्रोत पृष्ठ: 293-294

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## पद का स्रोत और उद्धरण

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मूल रचना: जगद्गुरु श्री कृपालु जी महाराज। पद और उपलब्ध हिन्दी भावार्थ प्रकाशित पुस्तक के उपलब्ध स्कैन से लिए गए हैं; ये कृत्रिम बुद्धिमत्ता से रचित पद या भावार्थ नहीं हैं। माधुरी और भक्ति चैलेंज के सजावटी चित्र Codex से बनाए गए हैं। वे मूल प्रकाशित पाठ, स्कैन और प्रकाशक के चित्रों से अलग हैं। पुस्तकालय के आवरण उपलब्ध PDF के आवरण/मूल पृष्ठ या प्रकाशक के प्रतिनिधि चित्र हैं; चित्र से संस्करण की समानता सिद्ध नहीं होती।

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मूल रचना की प्रथम प्रकाशन तिथि के उपलब्ध विवरण अलग हैं; इस संग्रह में उसका कोई एक निश्चित वर्ष नहीं माना गया है। अंग्रेज़ी संस्करण का अक्टूबर २००९ का प्रथम-संस्करण वर्ष मूल रचना के प्रथम प्रकाशन का वर्ष नहीं है।
