# लली सँग खेलत हार्यो लाल।

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भाषा: हिन्दी / ब्रज
स्रोत पहचान: PRM-0295-M07-K027
मूल रचना: प्रेम रस मदिरा — जगद्गुरु श्री कृपालु जी महाराज
माधुरी: श्री कृष्ण-बाल लीला-माधुरी
स्थानीय पद संख्या: 27
मूल पद के स्रोत पृष्ठ: 136–137

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## मूल पद

<a id="line-1"></a>लली सँग खेलत हार्यो लाल।  
<a id="line-2"></a>हारत ही भाज्यो पै लाली, पकर्यो कर गोपाल।  
<a id="line-3"></a>लली कह्यो कित भज्यो लला अब, दाउँ देउ ततकाल।  
<a id="line-4"></a>सक्यो छुड़ाय न जब कर तब हरि, ठान्यो रोदन-जाल।  
<a id="line-5"></a>लली छाँड़ि कर कही"जाहु अब, जनि आयो पुनि काल"।  
<a id="line-6"></a>जाय “कृपालु” कह्यो मैया सों, मोहिं मार्यो इक बाल॥

<a id="meaning"></a>
## हिन्दी भावार्थ

छोटे से कन्हैया छोटी सी किशोरी जी से खेल में हार गये। हारते ही भागने लगे, किन्तु किशोरी जी ने उनका हाथ पकड़ लिया और कहा 'कहाँ भागे जा रहे हो, दाँव देकर तब जाओ '। अत्यन्त प्रयत्न करने पर भी जब श्यामसुन्दर हाथ न छुड़ा सके तब खिसिया कर रोने लगे। रोते हुए श्यामसुन्दर के हाथ को छोड़ कर किशोरी जी ने कहा कि जाओ कल से हमारे साथ खेलने मत आना। कृपालु 'के शब्दों में श्यामसुन्दर और भी खीझ गये एवं किशोरी जी के विरुद्ध खूब बढ़ा-चढ़ा कर मैया से यह कहा कि मुझे एक बालिका ने आज बहुत मारा।

भावार्थ के स्रोत पृष्ठ: 290

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## पद का स्रोत और उद्धरण

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मूल रचना: जगद्गुरु श्री कृपालु जी महाराज। पद और उपलब्ध हिन्दी भावार्थ प्रकाशित पुस्तक के उपलब्ध स्कैन से लिए गए हैं; ये कृत्रिम बुद्धिमत्ता से रचित पद या भावार्थ नहीं हैं। माधुरी और भक्ति चैलेंज के सजावटी चित्र Codex से बनाए गए हैं। वे मूल प्रकाशित पाठ, स्कैन और प्रकाशक के चित्रों से अलग हैं। पुस्तकालय के आवरण उपलब्ध PDF के आवरण/मूल पृष्ठ या प्रकाशक के प्रतिनिधि चित्र हैं; चित्र से संस्करण की समानता सिद्ध नहीं होती।

प्रकाशक के अनुसार प्रेम रस मदिरा में २१ माधुरियों में १,००८ पद हैं। संग्रह में उपलब्ध स्रोत-अभिलेखों की स्थायी पहचान सुरक्षित रखी गई है; संख्या के अंतर का समाधान अभी लंबित है। पाँच हिन्दी भावार्थ उपलब्ध नहीं हैं। हिन्दी भावार्थ पूरे पद का है। पाठ में स्कैन से लिप्यंतरण की त्रुटियाँ रह सकती हैं। यह पाठ पुनर्वितरण की अनुमति नहीं देता।

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मूल रचना की प्रथम प्रकाशन तिथि के उपलब्ध विवरण अलग हैं; इस संग्रह में उसका कोई एक निश्चित वर्ष नहीं माना गया है। अंग्रेज़ी संस्करण का अक्टूबर २००९ का प्रथम-संस्करण वर्ष मूल रचना के प्रथम प्रकाशन का वर्ष नहीं है।
