# रेनु तनु मण्डित सुन्दर श्याम।

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भाषा: हिन्दी / ब्रज
स्रोत पहचान: PRM-0294-M07-K026
मूल रचना: प्रेम रस मदिरा — जगद्गुरु श्री कृपालु जी महाराज
माधुरी: श्री कृष्ण-बाल लीला-माधुरी
स्थानीय पद संख्या: 26
मूल पद के स्रोत पृष्ठ: 136–136

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## मूल पद

<a id="line-1"></a>रेनु तनु मण्डित सुन्दर श्याम।  
<a id="line-2"></a>भरि भरि मूठि धूरि सिर मेलत, अवहेलत शत काम।  
<a id="line-3"></a>कबहुँक दुध दँतुलिन-मुख आपुहिं, किलकत अति अभिराम।  
<a id="line-4"></a>कबहुँक कहि तोतरि बोलनि कछु, गुनगुनात गुनधाम।  
<a id="line-5"></a>कबहुँक टेरि बुलावत लै लै, दाऊ जी को नाम।  
<a id="line-6"></a>लखि यशुमति लै अंक खीझि कह, गहि निज-भुज-युग-दाम।  
<a id="line-7"></a>तुम हो पूर्व जनम के शूकर, सुनि विहँसत बलराम।  
<a id="line-8"></a>बलि बलि जात “कृपालु” लाल लखि, सिगरी ब्रज की बाम॥

<a id="meaning"></a>
## हिन्दी भावार्थ

(कवि धूल से सने हुए बालकृष्ण की तुलना पूर्वजन्म के शूकरावतार से करता है।) धूल से सने हुए बालकृष्ण अत्यन्त ही सुन्दर लग रहे हैं। बालकृष्ण धूल को मुद्ठियों से भर-भरकर बड़े ही हर्ष के साथ अपने सिर पर डालते हुए करोड़ों कामदेव को लज्जित कर रहे हैं। कभी तो अपने-आप ही दूध के दाँतों से युक्त मुख से अति ही मधुर किलकते हैं कभी तोतली भाषा में कुछ गुनगुनाते भी जाते हैं और कभी मस्ती में आकर दाऊजी को उनका नाम ले-लेकर पुकारते हैं। इस अवस्था में मैया ने जब अपने लाला को देखा तो अत्यन्त ही खीझकर अपने ही दोनों हाथों में जकड़कर श्रीकृष्ण को उठा लिया एवं अपनी गोद में लेकर झकझोरते हुए कहा 'तुम पिछले जन्म के शूकर मालूम पड़ते हो।'यह सुनकर बलराम हँसने लगे, क्योंकि श्रीकृष्ण का पहले शूकरावतार हो चुका है। यह रहस्य बलराम भली-भाँति जानते थे। 'कृपालु' कहते हैं कि इस प्रकार धूल-धूसरित बालकृष्ण को पूर्व जन्म का शूकर कहते हुए सुनकर समस्त ब्रजांगनायें भी आनन्द में विभोर हो गईं, क्योंकि वह भी उपर्युक्त अवतार रहस्य को जानती थीं।

भावार्थ के स्रोत पृष्ठ: 289-290

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## पद का स्रोत और उद्धरण

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