# धन्य सो मातु यशोमति भाम।

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भाषा: हिन्दी / ब्रज
स्रोत पहचान: PRM-0279-M07-K011
मूल रचना: प्रेम रस मदिरा — जगद्गुरु श्री कृपालु जी महाराज
माधुरी: श्री कृष्ण-बाल लीला-माधुरी
स्थानीय पद संख्या: 11
मूल पद के स्रोत पृष्ठ: 129–129

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## मूल पद

<a id="line-1"></a>धन्य सो मातु यशोमति भाम।  
<a id="line-2"></a>श्री कृष्णहिं"कनुवा", कहि टेरत"बलुवा"कहि बलराम।  
<a id="line-3"></a>"पूर्व जनम रह शूकर"कह लखि, धूरि धूसरित श्याम।  
<a id="line-4"></a>"पूर्व जनम रह मच्छ"कहत लखि, जल विहार अभिराम।  
<a id="line-5"></a>मुख माटी लखि लै कर साँटी, बाँधति ऊखल दाम।  
<a id="line-6"></a>बन्यो “कृपालु” पूत यशुमति को, जगत पिता नँदगाम॥

<a id="meaning"></a>
## हिन्दी भावार्थ

उन यशोदा मैया के धन्य भाग्य हैं जो पूर्णब्रह्म श्रीकृष्ण को 'कनुवाँ'एवं बलराम को 'बलुआ 'कहकर बुलाती हैं। श्यामसुन्दर को धूल में सने हुए देखकर कहती हैं कि तुम पिछले जन्म के सूअर हो (बात भी सत्य है)। पुन: श्यामसुन्दर को पानी में अधिक देर तक खेलते हुए देखकर कहती हैं कि तुम पिछले जन्म के मछली हो (बात भी सत्य है वे शूकर एवं मत्स्य बन चुके हैं।) श्यामसुन्दर के मुख में मिट्टी देखकर हाथ में डण्डा लेकर डराती हुई रस्सी से ऊखल में बाँध देती हैं। 'कृपालु' के शब्दों में सम्पूर्ण जगत् के पिता नन्दग्राम में एक अहीरनी यशोदा के पुत्र बने हैं।

भावार्थ के स्रोत पृष्ठ: 276

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## पद का स्रोत और उद्धरण

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मूल रचना: जगद्गुरु श्री कृपालु जी महाराज। पद और उपलब्ध हिन्दी भावार्थ प्रकाशित पुस्तक के उपलब्ध स्कैन से लिए गए हैं; ये कृत्रिम बुद्धिमत्ता से रचित पद या भावार्थ नहीं हैं। माधुरी और भक्ति चैलेंज के सजावटी चित्र Codex से बनाए गए हैं। वे मूल प्रकाशित पाठ, स्कैन और प्रकाशक के चित्रों से अलग हैं। पुस्तकालय के आवरण उपलब्ध PDF के आवरण/मूल पृष्ठ या प्रकाशक के प्रतिनिधि चित्र हैं; चित्र से संस्करण की समानता सिद्ध नहीं होती।

प्रकाशक के अनुसार प्रेम रस मदिरा में २१ माधुरियों में १,००८ पद हैं। संग्रह में उपलब्ध स्रोत-अभिलेखों की स्थायी पहचान सुरक्षित रखी गई है; संख्या के अंतर का समाधान अभी लंबित है। पाँच हिन्दी भावार्थ उपलब्ध नहीं हैं। हिन्दी भावार्थ पूरे पद का है। पाठ में स्कैन से लिप्यंतरण की त्रुटियाँ रह सकती हैं। यह पाठ पुनर्वितरण की अनुमति नहीं देता।

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मूल रचना की प्रथम प्रकाशन तिथि के उपलब्ध विवरण अलग हैं; इस संग्रह में उसका कोई एक निश्चित वर्ष नहीं माना गया है। अंग्रेज़ी संस्करण का अक्टूबर २००९ का प्रथम-संस्करण वर्ष मूल रचना के प्रथम प्रकाशन का वर्ष नहीं है।
