# नंद के भये आजु आनंद।

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भाषा: हिन्दी / ब्रज
स्रोत पहचान: PRM-0272-M07-K004
मूल रचना: प्रेम रस मदिरा — जगद्गुरु श्री कृपालु जी महाराज
माधुरी: श्री कृष्ण-बाल लीला-माधुरी
स्थानीय पद संख्या: 4
मूल पद के स्रोत पृष्ठ: 124–125

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## मूल पद

<a id="line-1"></a>नंद के भये आजु आनंद।  
<a id="line-2"></a>ब्रह्म सच्चिदानंद रूप धरि, प्रकट्यो आनँदकंद।  
<a id="line-3"></a>देव-वृंद दुंदुभिहिं बजावत, कहि कहि जय ब्रजचंद।  
<a id="line-4"></a>मंगल-गान करत ब्रह्मादिक, गाइ चारि श्रुतिछंद।  
<a id="line-5"></a>नारद शारद ज्ञान-विशारद, भाग्य सराहत नंद।  
<a id="line-6"></a>होत “कृपालु” सुकृत यशुमति लखि, वाणिहुँ वाणी बंद॥

<a id="meaning"></a>
## हिन्दी भावार्थ

आज नन्द महर के घर में आनन्द मूर्तिमान हो कर प्रकट हुआ है, क्योंकि आनन्दकंद सच्चिदानंद ब्रह्म श्रीकृष्ण चन्द्र ने सगुण साकार अवतार धारण किया है, जिसके आनन्द में देवताओं के समूह 'ब्रज चंद की जय हो'ऐसा कहकर दुंदुभी बजा रहे हैं। ब्रह्मादिक चारों वेदों की ऋचाओं का उच्चारण करते हुए मंगल गान कर रहे हैं। ज्ञानियों में सर्वश्रेष्ठ महर्षि नारद एवं सरस्वती जी नन्द के भाग्य की भूरि-भूरि सराहना कर रहे हैं। कृपालु' कहते हैं कि यशोदा मैया के पुण्य पुंज के बखान करते समय साक्षात् सरस्वती की भी वाणी रुक जाती है।

भावार्थ के स्रोत पृष्ठ: 267-268

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## पद का स्रोत और उद्धरण

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मूल रचना: जगद्गुरु श्री कृपालु जी महाराज। पद और उपलब्ध हिन्दी भावार्थ प्रकाशित पुस्तक के उपलब्ध स्कैन से लिए गए हैं; ये कृत्रिम बुद्धिमत्ता से रचित पद या भावार्थ नहीं हैं। माधुरी और भक्ति चैलेंज के सजावटी चित्र Codex से बनाए गए हैं। वे मूल प्रकाशित पाठ, स्कैन और प्रकाशक के चित्रों से अलग हैं। पुस्तकालय के आवरण उपलब्ध PDF के आवरण/मूल पृष्ठ या प्रकाशक के प्रतिनिधि चित्र हैं; चित्र से संस्करण की समानता सिद्ध नहीं होती।

प्रकाशक के अनुसार प्रेम रस मदिरा में २१ माधुरियों में १,००८ पद हैं। संग्रह में उपलब्ध स्रोत-अभिलेखों की स्थायी पहचान सुरक्षित रखी गई है; संख्या के अंतर का समाधान अभी लंबित है। पाँच हिन्दी भावार्थ उपलब्ध नहीं हैं। हिन्दी भावार्थ पूरे पद का है। पाठ में स्कैन से लिप्यंतरण की त्रुटियाँ रह सकती हैं। यह पाठ पुनर्वितरण की अनुमति नहीं देता।

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मूल रचना की प्रथम प्रकाशन तिथि के उपलब्ध विवरण अलग हैं; इस संग्रह में उसका कोई एक निश्चित वर्ष नहीं माना गया है। अंग्रेज़ी संस्करण का अक्टूबर २००९ का प्रथम-संस्करण वर्ष मूल रचना के प्रथम प्रकाशन का वर्ष नहीं है।
