# नाथ! जनि अब मो कहँ बहकाय।

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भाषा: हिन्दी / ब्रज
स्रोत पहचान: PRM-0206-M04-K055
मूल रचना: प्रेम रस मदिरा — जगद्गुरु श्री कृपालु जी महाराज
माधुरी: दैन्य-माधुरी
स्थानीय पद संख्या: 55
मूल पद के स्रोत पृष्ठ: 94–94

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## मूल पद

<a id="line-1"></a>नाथ! जनि अब मो कहँ बहकाय।  
<a id="line-2"></a>जिमि जननी निज शिशुहिं खिलौनहिं, दै गृह काजहिं जाय।  
<a id="line-3"></a>सुत बनितादि खिलौनहिं दै तिमि, अब लौं मोहिं बहलाय।  
<a id="line-4"></a>उत जग-जननि काज करि निज सुत, लेति गोद बैठाय।  
<a id="line-5"></a>पै तुम कहँ कछु काज न तबहूँ, कबहुँ न सुत उर लाय।  
<a id="line-6"></a>अब “कृपालु” तजि खेल खिलौनहिं, लोटत रुदन मचाय॥

<a id="meaning"></a>
## हिन्दी भावार्थ

हे नाथ। अब मुझे मिथ्या वस्तुओं से मत फुसलाओ। जिस प्रकार सांसारिक माता देकर फुसला देती है एवं स्वयं घर का काम करने चली जाती है, उसी प्रकार तुमने भी मुझे स्त्री, पति आदि खिलौने देकर अब तक बहुत बहलाया। एक आश्चर्य है कि संसार की माँ तो घर का काम करके अपने बच्चे को अपने आप गोद में बिठाकर खिलाती-पिलाती एवं दुलार करती है, किंतु तुम्हें कुछ काम न होते हुए भी तुमने अभी तक मुझ पुत्र को एक बार भी हृदय से नहीं लगाया। 'कृपालु' कहते हैं-अब मैंने भी रसिकों के परामर्श से सब खिलौनों को पटक कर, मचल कर, बालवत् करुण क्रन्दन करने की ठान ली है।

भावार्थ के स्रोत पृष्ठ: 217-218

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## पद का स्रोत और उद्धरण

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मूल रचना: जगद्गुरु श्री कृपालु जी महाराज। पद और उपलब्ध हिन्दी भावार्थ प्रकाशित पुस्तक के उपलब्ध स्कैन से लिए गए हैं; ये कृत्रिम बुद्धिमत्ता से रचित पद या भावार्थ नहीं हैं। माधुरी और भक्ति चैलेंज के सजावटी चित्र Codex से बनाए गए हैं। वे मूल प्रकाशित पाठ, स्कैन और प्रकाशक के चित्रों से अलग हैं। पुस्तकालय के आवरण उपलब्ध PDF के आवरण/मूल पृष्ठ या प्रकाशक के प्रतिनिधि चित्र हैं; चित्र से संस्करण की समानता सिद्ध नहीं होती।

प्रकाशक के अनुसार प्रेम रस मदिरा में २१ माधुरियों में १,००८ पद हैं। संग्रह में उपलब्ध स्रोत-अभिलेखों की स्थायी पहचान सुरक्षित रखी गई है; संख्या के अंतर का समाधान अभी लंबित है। पाँच हिन्दी भावार्थ उपलब्ध नहीं हैं। हिन्दी भावार्थ पूरे पद का है। पाठ में स्कैन से लिप्यंतरण की त्रुटियाँ रह सकती हैं। यह पाठ पुनर्वितरण की अनुमति नहीं देता।

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मूल रचना की प्रथम प्रकाशन तिथि के उपलब्ध विवरण अलग हैं; इस संग्रह में उसका कोई एक निश्चित वर्ष नहीं माना गया है। अंग्रेज़ी संस्करण का अक्टूबर २००९ का प्रथम-संस्करण वर्ष मूल रचना के प्रथम प्रकाशन का वर्ष नहीं है।
