# कहाँ हरि! सोये हमरिहिं बार।

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भाषा: हिन्दी / ब्रज
स्रोत पहचान: PRM-0177-M04-K026
मूल रचना: प्रेम रस मदिरा — जगद्गुरु श्री कृपालु जी महाराज
माधुरी: दैन्य-माधुरी
स्थानीय पद संख्या: 26
मूल पद के स्रोत पृष्ठ: 80–80

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## मूल पद

<a id="line-1"></a>कहाँ हरि! सोये हमरिहिं बार।  
<a id="line-2"></a>पतित पुकार सुनत ही धावत, नेकु न लावत बार।  
<a id="line-3"></a>कारण रहित कृपालु सदा ते, जानत तोहिं संसार।  
<a id="line-4"></a>कैसेहुँ पतित शरण टुक आये, राखत चरण मझार।  
<a id="line-5"></a>पतितन ही सों प्यार करत नित, अस कह संत पुकार।  
<a id="line-6"></a>पुनि अति पतित “कृपालु” पेखि कत, उर निष्ठुरता धार॥

<a id="meaning"></a>
## हिन्दी भावार्थ

हे श्यामसुन्दर! आज तक किसी भी पतित के आर्तनाद को सुनकर तुमने थोड़ी भी देर नहीं की, फिर आज हमारी ही बार कहाँ जाकर सो गये। सारा संसार तुम्हें बिना कारण के ही कृपा करने वाला अनादिकाल से जानता है। कैसा भी पतित तुम्हारी शरण में कभी आ जाय, उसे तुम सदा के लिए अपना बनाकर सर्वदा उसे अपने चरणों के पास ही रखते हो। रसिक जन पुकार-पुकार कर कहते हैं कि श्यामसुन्दर शरणागत पतितों से ही प्यार करते हैं। यदि यह सच है तो कृपालु' कहते हैं कि फिर मुझे, अत्यन्त पतित जानकर भी अपने हृदय को क्यों कठोर बना लिया है, मेरे ऊपर कृपा क्यों महीं करते?

भावार्थ के स्रोत पृष्ठ: 194

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## पद का स्रोत और उद्धरण

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मूल रचना: जगद्गुरु श्री कृपालु जी महाराज। पद और उपलब्ध हिन्दी भावार्थ प्रकाशित पुस्तक के उपलब्ध स्कैन से लिए गए हैं; ये कृत्रिम बुद्धिमत्ता से रचित पद या भावार्थ नहीं हैं। माधुरी और भक्ति चैलेंज के सजावटी चित्र Codex से बनाए गए हैं। वे मूल प्रकाशित पाठ, स्कैन और प्रकाशक के चित्रों से अलग हैं। पुस्तकालय के आवरण उपलब्ध PDF के आवरण/मूल पृष्ठ या प्रकाशक के प्रतिनिधि चित्र हैं; चित्र से संस्करण की समानता सिद्ध नहीं होती।

प्रकाशक के अनुसार प्रेम रस मदिरा में २१ माधुरियों में १,००८ पद हैं। संग्रह में उपलब्ध स्रोत-अभिलेखों की स्थायी पहचान सुरक्षित रखी गई है; संख्या के अंतर का समाधान अभी लंबित है। पाँच हिन्दी भावार्थ उपलब्ध नहीं हैं। हिन्दी भावार्थ पूरे पद का है। पाठ में स्कैन से लिप्यंतरण की त्रुटियाँ रह सकती हैं। यह पाठ पुनर्वितरण की अनुमति नहीं देता।

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मूल रचना की प्रथम प्रकाशन तिथि के उपलब्ध विवरण अलग हैं; इस संग्रह में उसका कोई एक निश्चित वर्ष नहीं माना गया है। अंग्रेज़ी संस्करण का अक्टूबर २००९ का प्रथम-संस्करण वर्ष मूल रचना के प्रथम प्रकाशन का वर्ष नहीं है।
