# अपनी ओर टुक हेरो री, किशोरी राधे।

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भाषा: हिन्दी / ब्रज
स्रोत पहचान: PRM-0153-M04-K002
मूल रचना: प्रेम रस मदिरा — जगद्गुरु श्री कृपालु जी महाराज
माधुरी: दैन्य-माधुरी
स्थानीय पद संख्या: 2
मूल पद के स्रोत पृष्ठ: 69–70

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## मूल पद

<a id="line-1"></a>अपनी ओर टुक हेरो री, किशोरी राधे।  
<a id="line-2"></a>हौं तो कुटिल नीच सब दिन को,  
<a id="line-3"></a>विश्व विदित अघ मेरो री किशोरी राधे!  
<a id="line-4"></a>पै"बिनु हेतु पतितपावनि"यह,  
<a id="line-5"></a>विरद दुर्यो कित तेरो री किशोरी राधे!  
<a id="line-6"></a>शिशु नवजात न जानत मातहिं,  
<a id="line-7"></a>रहत मातु रुचि चेरो री किशोरी राधे!  
<a id="line-8"></a>त्यों हौं अति अबोध जड़ पामर,  
<a id="line-9"></a>महामोह तम घेरो री किशोरी राधे!  
<a id="line-10"></a>हमरिहिं बेर बेर कत एतिक,  
<a id="line-11"></a>याको करिय निबेरो री किशोरी राधे!  
<a id="line-12"></a>जगहुँ सुनात “कृपालु” कुमात न,  
<a id="line-13"></a>यदपि कुपूत घनेरो री किशोरी राधे!

<a id="meaning"></a>
## हिन्दी भावार्थ

हे बरसाने वाली राधे! हमारी ओर न देखकर केवल अपनी ओर देखिए। मैं तो अनादि-कालसे ही आपको भूलकर अत्यन्त ही कुटिल एवं नीच बन चुका हूँ, तथा मेरे पापों को भी सारा संसार जानता है। किन्तु "बिना कारण ही महान्-से महान् पतितों को पवित्र करनेवाली 'तुम्हारी इस प्रतिज्ञा का क्या होगा? मुझे इसका विचार है। जिस प्रकार नवजात बालक अपनी माता को पहिचान नहीं सकता, माता ही स्वभावतः उसकी इच्छाओं को पूर्ण करती है। उसी प्रकार मैं भी तो अत्यन्त अनजान, हठी एवं दुष्ट तुम्हारा ही बालक तो हूँ, जो अत्यन्त भयावह अज्ञान के अँधेरे में पड़ा हूँ। आपने किसी भी पतित के लिए इतनी देर नहीं की, फिर हमारे लिए इतनी देर क्यों कर रही हो, इसका विचार कीजिए। 'कृपालु' कहते हैं कि संसार में कुपुत्र कितने ही हो जाएँ, किन्तु कुमाता एक भी नहीं सुनाई पड़ती, बस इससे अधिक मुझे कुछ नहीं कहना है।

भावार्थ के स्रोत पृष्ठ: 175-176

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## पद का स्रोत और उद्धरण

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मूल रचना: जगद्गुरु श्री कृपालु जी महाराज। पद और उपलब्ध हिन्दी भावार्थ प्रकाशित पुस्तक के उपलब्ध स्कैन से लिए गए हैं; ये कृत्रिम बुद्धिमत्ता से रचित पद या भावार्थ नहीं हैं। माधुरी और भक्ति चैलेंज के सजावटी चित्र Codex से बनाए गए हैं। वे मूल प्रकाशित पाठ, स्कैन और प्रकाशक के चित्रों से अलग हैं। पुस्तकालय के आवरण उपलब्ध PDF के आवरण/मूल पृष्ठ या प्रकाशक के प्रतिनिधि चित्र हैं; चित्र से संस्करण की समानता सिद्ध नहीं होती।

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मूल रचना की प्रथम प्रकाशन तिथि के उपलब्ध विवरण अलग हैं; इस संग्रह में उसका कोई एक निश्चित वर्ष नहीं माना गया है। अंग्रेज़ी संस्करण का अक्टूबर २००९ का प्रथम-संस्करण वर्ष मूल रचना के प्रथम प्रकाशन का वर्ष नहीं है।
