# लाल सम लालहिं निठुर कृपाल।

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भाषा: हिन्दी / ब्रज
स्रोत पहचान: PRM-0107-M03-K098
मूल रचना: प्रेम रस मदिरा — जगद्गुरु श्री कृपालु जी महाराज
माधुरी: सिद्धान्त-माधुरी
स्थानीय पद संख्या: 98
मूल पद के स्रोत पृष्ठ: 50–50

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## मूल पद

<a id="line-1"></a>लाल सम लालहिं निठुर कृपाल।  
<a id="line-2"></a>नित्य विरोधाभास रहत जहँ, सोइ ब्रह्म गोपाल।  
<a id="line-3"></a>अति कोमल चित नवनीतहुँ ते, कर्कश कुलिश कराल।  
<a id="line-4"></a>तन मन प्राण समर्पण किय जो, देत विरह ब्रजबाल।  
<a id="line-5"></a>बरबस बरि कुबरिहिं करि अपनी, विहरत सोइ नँदलाल।  
<a id="line-6"></a>सुनि “कृपालु” तुम जनि कछु सोचिय, लीला प्रेम रसाल॥

<a id="meaning"></a>
## हिन्दी भावार्थ

श्यामसुन्दर के समान निष्ठुर एवं दयालु श्यामसुन्दर ही हैं। जहाँ पर नित्य विरोधाभास रहे वही ब्रह्म श्यामसुन्दर की पहिचान है। एक ओर तो उनका हृदय मक्खन से भी अधिक कोमल है, दूसरी ओर उन्हीं का हृदय वज्र से भी अधिक कठोर भी है। जिन ब्रज गोपियों ने अपना सर्वस्व दे दिया, उन्हें तो निष्ठुर बनकर उन्होंने वियोग दिया एवं कोमलता का परिचय देते हुए कुब्जा सरीखी कुरूपा स्त्री के तिलक लगाने मात्र से उसे अपनी प्रेयसी बनाकर विहार करते हैं। कृपालु' कहते हैं कि तुम उपरोक्त बात सुनकर कुछ अंडबंड न सोचने लगना। यह तो इनकी मधुर प्रेम-लीला है, वास्तव में तो वे दयालु ही हैं।

भावार्थ के स्रोत पृष्ठ: 138-139

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## पद का स्रोत और उद्धरण

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मूल रचना: जगद्गुरु श्री कृपालु जी महाराज। पद और उपलब्ध हिन्दी भावार्थ प्रकाशित पुस्तक के उपलब्ध स्कैन से लिए गए हैं; ये कृत्रिम बुद्धिमत्ता से रचित पद या भावार्थ नहीं हैं। माधुरी और भक्ति चैलेंज के सजावटी चित्र Codex से बनाए गए हैं। वे मूल प्रकाशित पाठ, स्कैन और प्रकाशक के चित्रों से अलग हैं। पुस्तकालय के आवरण उपलब्ध PDF के आवरण/मूल पृष्ठ या प्रकाशक के प्रतिनिधि चित्र हैं; चित्र से संस्करण की समानता सिद्ध नहीं होती।

प्रकाशक के अनुसार प्रेम रस मदिरा में २१ माधुरियों में १,००८ पद हैं। संग्रह में उपलब्ध स्रोत-अभिलेखों की स्थायी पहचान सुरक्षित रखी गई है; संख्या के अंतर का समाधान अभी लंबित है। पाँच हिन्दी भावार्थ उपलब्ध नहीं हैं। हिन्दी भावार्थ पूरे पद का है। पाठ में स्कैन से लिप्यंतरण की त्रुटियाँ रह सकती हैं। यह पाठ पुनर्वितरण की अनुमति नहीं देता।

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मूल रचना की प्रथम प्रकाशन तिथि के उपलब्ध विवरण अलग हैं; इस संग्रह में उसका कोई एक निश्चित वर्ष नहीं माना गया है। अंग्रेज़ी संस्करण का अक्टूबर २००९ का प्रथम-संस्करण वर्ष मूल रचना के प्रथम प्रकाशन का वर्ष नहीं है।
