# लख्यो जग इक अचरज की बात।

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भाषा: हिन्दी / ब्रज
स्रोत पहचान: PRM-0102-M03-K093
मूल रचना: प्रेम रस मदिरा — जगद्गुरु श्री कृपालु जी महाराज
माधुरी: सिद्धान्त-माधुरी
स्थानीय पद संख्या: 93
मूल पद के स्रोत पृष्ठ: 48–48

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## मूल पद

<a id="line-1"></a>लख्यो जग इक अचरज की बात।  
<a id="line-2"></a>बरसत बूँद पकरि नभ चढ़ि चह, जो मन बुधि न समात।  
<a id="line-3"></a>विधि हरि हर जेहि जानि न पावत, प्रभु प्रभुता विख्यात।  
<a id="line-4"></a>बिनु जाने प्रतीति नहिं तेहि बिनु, प्रीति न कतहुँ लखात।  
<a id="line-5"></a>बिना प्रीति नहिं द्रवत पिया, यह, सोचि जिया अकुलात।  
<a id="line-6"></a>यह “कृपालु” तो पिय-मग जोहत, खर्यो रहत दिन रात॥

<a id="meaning"></a>
## हिन्दी भावार्थ

संसार की एक आश्चर्य की बात सुनो। बरसते हुए बादलों की बूँदों को पकड़कर जीव आकाश में चढ़ना चाहता है, जो कि मन-बुद्धि से परे का विषय है। यह सर्वसिद्ध विषय है कि भगवान् के रहस्यों को ब्रह्मा, विष्णु शंकर भी बुद्धि के बल से नहीं समझ सकते। बिना समझे विश्वास दृढ़ नहीं होता एवं बिना विश्वास के दृढ़ प्रेम भी नहीं हो सकता और बिना प्रेम के प्रियतम पिघलते भी नहीं। यह सब सोचकर हृदय अत्यन्त व्याकुल हो जाता है। 'कृपालु' कहते हैं कि मैं तो एकमात्र निरंतर प्रियतम श्री कृष्ण की कृपा की बाट जोह रहा हूँ।

भावार्थ के स्रोत पृष्ठ: 135

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## पद का स्रोत और उद्धरण

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मूल रचना: जगद्गुरु श्री कृपालु जी महाराज। पद और उपलब्ध हिन्दी भावार्थ प्रकाशित पुस्तक के उपलब्ध स्कैन से लिए गए हैं; ये कृत्रिम बुद्धिमत्ता से रचित पद या भावार्थ नहीं हैं। माधुरी और भक्ति चैलेंज के सजावटी चित्र Codex से बनाए गए हैं। वे मूल प्रकाशित पाठ, स्कैन और प्रकाशक के चित्रों से अलग हैं। पुस्तकालय के आवरण उपलब्ध PDF के आवरण/मूल पृष्ठ या प्रकाशक के प्रतिनिधि चित्र हैं; चित्र से संस्करण की समानता सिद्ध नहीं होती।

प्रकाशक के अनुसार प्रेम रस मदिरा में २१ माधुरियों में १,००८ पद हैं। संग्रह में उपलब्ध स्रोत-अभिलेखों की स्थायी पहचान सुरक्षित रखी गई है; संख्या के अंतर का समाधान अभी लंबित है। पाँच हिन्दी भावार्थ उपलब्ध नहीं हैं। हिन्दी भावार्थ पूरे पद का है। पाठ में स्कैन से लिप्यंतरण की त्रुटियाँ रह सकती हैं। यह पाठ पुनर्वितरण की अनुमति नहीं देता।

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मूल रचना की प्रथम प्रकाशन तिथि के उपलब्ध विवरण अलग हैं; इस संग्रह में उसका कोई एक निश्चित वर्ष नहीं माना गया है। अंग्रेज़ी संस्करण का अक्टूबर २००९ का प्रथम-संस्करण वर्ष मूल रचना के प्रथम प्रकाशन का वर्ष नहीं है।
