# जाउँ गुरु, चरण-कमल बलिहार।

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भाषा: हिन्दी / ब्रज
स्रोत पहचान: PRM-0004-M01-K004
मूल रचना: प्रेम रस मदिरा — जगद्गुरु श्री कृपालु जी महाराज
माधुरी: सद्गुरु-माधुरी
स्थानीय पद संख्या: 4
मूल पद के स्रोत पृष्ठ: 2–2

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## मूल पद

<a id="line-1"></a>जाउँ गुरु, चरण-कमल बलिहार।  
<a id="line-2"></a>जिन चरनन की शरण गहत मन, पावत युगल-विहार।  
<a id="line-3"></a>जिन चरनन को ध्यान धरत मन, मिटत जगत अँधियार।  
<a id="line-4"></a>जिन चरनन अनुकंपा जग मँह, रहत न रह संसार।  
<a id="line-5"></a>जिन चरनन-रज आँजि चराचर, दीखत नंदकुमार।  
<a id="line-6"></a>यदपि “कृपालु” भेद नहिं हरि-गुरु, तदपि गुरुहिं आभार॥

<a id="meaning"></a>
## हिन्दी भावार्थ

मैं सद्गुरु महाराज के चरण-कमलों पर बलिहार जाता हूँ। उन चरणों की शरण ग्रहण करके मन श्यामा श्याम का रास-विहार-रस पाता है एवं उन चरणों की कृपा से ही अज्ञानांधकार सदा को समाप्त हो जाता है। उन चरणों की को श्रद्धापूर्वक आँखों में लगाने से श्यामसुन्दर का दिव्य रशन प्राप्त होता है। 'कृपालु' कहते हैं कि गुरु एवं हरि में यद्यपि भेद नहीं हैं तथापि गुरु द्वारा ही हरि की प्राप्ति होने के कारण गुरु के प्रति विशेष आभार है।

भावार्थ के स्रोत पृष्ठ: 50

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## पद का स्रोत और उद्धरण

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मूल रचना: जगद्गुरु श्री कृपालु जी महाराज। पद और उपलब्ध हिन्दी भावार्थ प्रकाशित पुस्तक के उपलब्ध स्कैन से लिए गए हैं; ये कृत्रिम बुद्धिमत्ता से रचित पद या भावार्थ नहीं हैं। माधुरी और भक्ति चैलेंज के सजावटी चित्र Codex से बनाए गए हैं। वे मूल प्रकाशित पाठ, स्कैन और प्रकाशक के चित्रों से अलग हैं। पुस्तकालय के आवरण उपलब्ध PDF के आवरण/मूल पृष्ठ या प्रकाशक के प्रतिनिधि चित्र हैं; चित्र से संस्करण की समानता सिद्ध नहीं होती।

प्रकाशक के अनुसार प्रेम रस मदिरा में २१ माधुरियों में १,००८ पद हैं। संग्रह में उपलब्ध स्रोत-अभिलेखों की स्थायी पहचान सुरक्षित रखी गई है; संख्या के अंतर का समाधान अभी लंबित है। पाँच हिन्दी भावार्थ उपलब्ध नहीं हैं। हिन्दी भावार्थ पूरे पद का है। पाठ में स्कैन से लिप्यंतरण की त्रुटियाँ रह सकती हैं। यह पाठ पुनर्वितरण की अनुमति नहीं देता।

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मूल रचना की प्रथम प्रकाशन तिथि के उपलब्ध विवरण अलग हैं; इस संग्रह में उसका कोई एक निश्चित वर्ष नहीं माना गया है। अंग्रेज़ी संस्करण का अक्टूबर २००९ का प्रथम-संस्करण वर्ष मूल रचना के प्रथम प्रकाशन का वर्ष नहीं है।
