# मुरली-माधुरी · प्रेम रस मदिरा

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जगद्गुरु श्री कृपालु जी महाराज की प्रेम रस मदिरा की 21 माधुरियों में मुरली-माधुरी क्रमांक 17 पर है। इसमें 9 पद हैं। मूल पद और उपलब्ध पुस्तक-स्रोत हिन्दी भावार्थ पढ़ें।

[पुस्तक की अनुक्रमणिका](https://radhey.shreyam1008.com.np/prem-ras-madira/) · [English](https://radhey.shreyam1008.com.np/en/prem-ras-madira/madhuri/m17/)

- [पद 1: अलि! मुरली के बड़ भाग रे।](https://radhey.shreyam1008.com.np/prem-ras-madira/pad/prm-0713-m17-k001/)
- [पद 2: अली मोरी, मुरली कौन लई?।](https://radhey.shreyam1008.com.np/prem-ras-madira/pad/prm-0714-m17-k002/)
- [पद 3: अली! यह मुरली बुरी बलाय।](https://radhey.shreyam1008.com.np/prem-ras-madira/pad/prm-0715-m17-k003/)
- [पद 4: अली! यह, मुरली बैर परी।](https://radhey.shreyam1008.com.np/prem-ras-madira/pad/prm-0716-m17-k004/)
- [पद 5: अरी सखि! क्यों मो पै रिसियाय।](https://radhey.shreyam1008.com.np/prem-ras-madira/pad/prm-0717-m17-k005/)
- [पद 6: बँसुरिया, सखि! या लेहु छिनाय।](https://radhey.shreyam1008.com.np/prem-ras-madira/pad/prm-0718-m17-k006/)
- [पद 7: मधुर-धुनि, मुरली बजावत कान्ह।](https://radhey.shreyam1008.com.np/prem-ras-madira/pad/prm-0719-m17-k007/)
- [पद 8: रवति कहुँ, मुरली कुंज कुटीर।](https://radhey.shreyam1008.com.np/prem-ras-madira/pad/prm-0720-m17-k008/)
- [पद 9: श्याम तोरी, मुरली ने जुलुम करी।](https://radhey.shreyam1008.com.np/prem-ras-madira/pad/prm-0721-m17-k009/)

यह अनौपचारिक, व्यक्तिगत और आंशिक संग्रह है।

मूल रचना: जगद्गुरु श्री कृपालु जी महाराज। पद और उपलब्ध हिन्दी भावार्थ प्रकाशित पुस्तक के उपलब्ध स्कैन से लिए गए हैं; ये कृत्रिम बुद्धिमत्ता से रचित पद या भावार्थ नहीं हैं। माधुरी और भक्ति चैलेंज के सजावटी चित्र Codex से बनाए गए हैं। वे मूल प्रकाशित पाठ, स्कैन और प्रकाशक के चित्रों से अलग हैं। पुस्तकालय के आवरण उपलब्ध PDF के आवरण/मूल पृष्ठ या प्रकाशक के प्रतिनिधि चित्र हैं; चित्र से संस्करण की समानता सिद्ध नहीं होती।

प्रकाशक के अनुसार प्रेम रस मदिरा में २१ माधुरियों में १,००८ पद हैं। संग्रह में उपलब्ध स्रोत-अभिलेखों की स्थायी पहचान सुरक्षित रखी गई है; संख्या के अंतर का समाधान अभी लंबित है। पाँच हिन्दी भावार्थ उपलब्ध नहीं हैं। हिन्दी भावार्थ पूरे पद का है। पाठ में स्कैन से लिप्यंतरण की त्रुटियाँ रह सकती हैं। यह पाठ पुनर्वितरण की अनुमति नहीं देता।

- [आधिकारिक पूर्ण साहित्य संग्रह](https://www.jkpliterature.org.in/)
- [लेखक का आधिकारिक परिचय](https://jagadgurukripalujimaharaj.org.in/)
- [प्रेम रस मदिरा: आधिकारिक पुस्तक विवरण](https://www.jkpliterature.org.in/products/prem-ras-madira-regular-size)
- [संस्करण और स्रोत प्रमाण](https://radhey.shreyam1008.com.np/content/provenance.json)
- [पुस्तकालय के आवरणों का स्रोत विवरण](https://radhey.shreyam1008.com.np/content/books/index.json)
- [स्रोत और पाठ-सुधार](https://radhey.shreyam1008.com.np/collection/)

मूल रचना की प्रथम प्रकाशन तिथि के उपलब्ध विवरण अलग हैं; इस संग्रह में उसका कोई एक निश्चित वर्ष नहीं माना गया है। अंग्रेज़ी संस्करण का अक्टूबर २००९ का प्रथम-संस्करण वर्ष मूल रचना के प्रथम प्रकाशन का वर्ष नहीं है।


![चाँदनी में बांसुरी बजाते श्रीकृष्ण से निकलती कल्पित स्वर्णिम ध्वनि-लहरें; वन में सुनते हिरण, मोर और पक्षी](https://radhey.shreyam1008.com.np/assets/madhuri/v2/17-murli.webp)

AI-generated decorative illustration; not an original book image or announcement poster.

