# मम अलबेली सरकार, मम श्री वृषभानु दुलार।

Jagadguru Shri Kripalu Ji Maharaj

Source ID: native-yugal-shatak-2005:yugal-shatak-2005-kirtan-093
Canonical page: https://radhey.shreyam1008.com.np/read/yugal-shatak-2005/yugal-shatak-2005-kirtan-093/
Book: Yugal Shatak
Source edition: 17-hi-2005; SHA-256 65e97712a464ad9a811875abe92d7ad166ef58f82c9b675cf4d010c1c940a7f7
Source PDF pages: 193–195



<a id="line-1"></a>मम अलबेली सरकार, मम श्री वृषभानु दुलार।  
<a id="line-2"></a>मम प्रेम रूप रस सार, तव महिमा अपरंपार॥  
<a id="line-3"></a>तुम स्वामिनि नंद कुमार, तुम मादन रस साकार।  
<a id="line-4"></a>तुम करुणा की भंडार, तव महिमा अपरंपार॥

<a id="line-5"></a>तुम पतितन सुनत पुकार, तुम दीनन की रखवार।  
<a id="line-6"></a>तुम अधम उधारन हार, तव महिमा अपरंपार॥  
<a id="line-7"></a>तुम ही जग सर्जनि हार, तुम ही जग पालनि हार।  
<a id="line-8"></a>तुम ही कर जग संहार, तव महिमा अपरंपार॥  
<a id="line-9"></a>तव ध्यान धरत रिझवार, गुन गावत नंदकुमार।  
<a id="line-10"></a>तव कर हरि जय जय कार, तव महिमा अपरंपार॥  
<a id="line-11"></a>तव पग चापत रिझवार, तव छवि लखि छवि बलिहार।  
<a id="line-12"></a>तव आरति श्याम उतार, तव महिमा अपरंपार॥  
<a id="line-13"></a>तुम महाभाव साकार, तुम आत्मा नंदकुमार।  
<a id="line-14"></a>तुम प्राण प्राण ब्रजनार, तव महिमा अपरंपार॥  
<a id="line-15"></a>तुम पर अगनित रति वार, तुम पर गिरिधर बलिहार।  
<a id="line-16"></a>तुम पर वारी ब्रजनार, तव महिमा अपरंपार॥  
<a id="line-17"></a>तुम शरणागत रखवार, तुम ब्रज रस बाँटनि हार।  
<a id="line-18"></a>तुम बिनु कारण कर प्यार, तुम पर “कृपालु” बलिहार॥

Published Hindi meaning — सुश्री ब्रजकुंजरी देवी

<a id="line-19"></a>भावार्थ—हे मेरी अलबेली वृषभानुदुलारी! तुम प्रेम, रूप एवं  
<a id="line-20"></a>रस की सार सर्वस्व स्वरूपा हो। तुम्हारी महिमा का कोई अन्त  
<a id="line-21"></a>नहीं पा सकता। तुम श्रीकृष्ण की स्वामिनी हो। मादन-रस की  
<a id="line-22"></a>साकार प्रतिमा हो। तुम अत्यन्त ही करुणामयी हो। तुम अनन्त  
<a id="line-23"></a>महिमामयी हो। तुम पतित-जनों का क्रन्दन सुनने में विलम्ब नहीं  
<a id="line-24"></a>करती हो। दीन-जनों की रक्षा भी तुम ही करती हो। राधे! अधमों  
<a id="line-25"></a>का उद्धार करने वाली भी एकमात्र तुम ही हो। जगत् की रचना,  
<a id="line-26"></a>पालन एवं संहार तुम्हारे द्वारा ही होता है। श्यामसुन्दर हृदय में  
<a id="line-27"></a>तुम्हारा ही ध्यान करते हैं वाणी से तुम्हारा गुणानुवाद करते हैं।

Published Hindi meaning — सुश्री ब्रजकुंजरी देवी

<a id="line-28"></a>बार-बार तुम्हारी जय जयकार करते हैं। तुम्हारी असीम महिमा  
<a id="line-29"></a>का वर्णन नहीं किया जा सकता। श्यामसुन्दर तुम्हारे चरणों को  
<a id="line-30"></a>दबाते हैं। तुम्हारी छवि पर छवि भी बलिहार जाती है। श्यामसुन्दर  
<a id="line-31"></a>तुम्हारी आरती उतारते हैं, तुम्हारी महिमा अनन्त है। तुम साक्षात्  
<a id="line-32"></a>महाभाव स्वरूपा हो, तुम श्रीकृष्ण की आत्मा ही हो। तुम ब्रज-  
<a id="line-33"></a>गोपियों के प्राणों की भी प्राण हो। तुम्हारे अनुपम सौन्दर्य पर असंख्य  
<a id="line-34"></a>रति निछावर की जा सकती हैं। श्रीकृष्ण भी तुम पर बलिहार जाते  
<a id="line-35"></a>हैं। ब्रजांगनाएँ तुम पर स्वयं को निछावर करती हैं, तुम्हारी महिमा  
<a id="line-36"></a>का कोई ओर छोर नहीं है। तुम शरणागत की रक्षा करने में समर्थ  
<a id="line-37"></a>हो, ब्रजरस का वितरण करती हो। अकारण जीवों को प्रेम प्रदान  
<a id="line-38"></a>करती हो। “श्रीकृपालु” तुम पर बलिहार जाते हैं।

Native Hindi songs and published Hindi explanations from the supplied 2005 edition. The older image-only Yugal Shatak scan remains a separate source. Supplied edition: Third edition, Sharad Purnima, 17 October 2005. Published explanation: सुश्री ब्रजकुंजरी देवी.

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Unofficial source transcription. Roman transliteration is not an English translation. No missing meanings are generated.
